जेवलिन थ्रो: तेज और सटीक कैसे बनें?
जेवलिन थ्रो में दूरी के साथ साथ सही तकनीक चाहिए। क्या आप सोच रहे हैं कि बेहतर ग्रिप, रन-अप या पावर किस तरह बढ़े? यहाँ आसान और प्रैक्टिकल टिप्स दिए हैं जो सीधे अभ्यास में काम आएंगे।
टेकनीक के चार हिस्से
जेवलिन थ्रो की तकनीक को चार हिस्सों में बाँटकर समझें: रन-अप, ट्रांज़िशन, डिलीवरी और रिकवरी। रन-अप में नियंत्रण जरूरी है — तेज़ दौड़ पर भी संतुलन बनाए रखें ताकि आखिरी कदम पर सटीक ताकत लग सके।
ट्रांज़िशन यानी आखिरी दो-तीन कदम सबसे अहम होते हैं। शरीर को हवा में नहीं झटकें; कंधा और हिप एक लाइन में रखें और कनेक्शन से ताकत फेंक की दिशा में ट्रांसफर करें। डिलीवरी में जाँघ, कंधा और हाथ एक संग काम करें — एम्बोला की तरह। रिकवरी पर ध्यान इसलिए क्योंकि फेंक के बाद गिरना या संतुलन खोना फाउल बन सकता है।
ग्रिप सीधा और आरामदायक होना चाहिए। जावेलिन को इतना कसकर पकड़ें कि रिलीज पर उंगलियाँ छूट सकें, पर इतना ढीला भी न हो कि नियंत्रण खो जाए। आम सवाल: "क्या जावेलिन ऊँचा फेंकें या हथौड़े की तरह?" जवाब ये है — टेढ़ी उड़ान (optimal angle) पर जब टिप पहले जमीन को छुए, तभी दूरी बढ़ती है।
प्रशिक्षण, ड्रिल और चोट से बचाव
सादा प्रशिक्षण प्लान: 3-4 दिन तकनीक (स्टैंडिंग थ्रो, रन-अप ड्रिल, शॉट/मेडिसिन बॉल), 2 दिन बल और पावर (प्लायोमेट्रिक्स, लेग स्ट्रेन्थ), और 1-2 दिन आराम/लाइट रिकवरी। हर सेशन से पहले वार्म-अप और स्ट्रेचिंग जरूरी है — खासकर कंधे, हिप और थोरासिक स्पाइन।
ड्रिल्स में शामिल करें: स्टेटिक थ्रो (छोटा रन-अप या बिना रन-अप के), बैंड रेजिस्टेंस पुश, मेडिसिन बॉल ओवरहेड थ्रो और आखिरी कदम की सिमुलेशन। ये ड्रिल आपकी कनेक्शन और पावर ट्रांसफर सुधारेंगे।
चोट से बचने के लिए: कंधे और रोटेटर कफ मजबूत रखें, बहुत तेज़ अचानक भार न बढ़ाएँ, और थकान में भारी फेंक न करें। गर्दन, कंधा या कोहनी में दर्द महसूस हो तो आराम लें और फिजियो के पास जाएँ।
प्रतियोगिता नियम आसान होते हैं: रनवे आमतौर पर 30-36.5 मीटर होता है, फाउल लाइन पार होने पर प्रयास नकारा जाता है, और नाप फाउल लाइन से जावेलिन के किसी भी अंकन बिंदु तक मापा जाता है।
अंत में, याद रखें — लगातार छोटे सुधार बड़े बदलाव लाते हैं। रोज़ाना छोटे-छोटे तकनीक-ड्रिल और सही रिकवरी से दूरी बढ़ेगी। अगर आप प्रो बनने की सोच रहे हैं, तो कोच की निगरानी और सिस्टेमेटिक पावर प्रोग्राम सबसे ज़रूरी हैं। चाहें आप शुरुआती हों या अनुभवी, सही अभ्यास और अनुशासन से आप बेहतर फेंक हासिल कर सकते हैं।
नीरज चोपड़ा ने लॉज़ेन डायमंड लीग 2024 में अपनी दूसरी सर्वश्रेष्ठ थ्रो दर्ज की
भारतीय जेवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा ने लॉज़ेन डायमंड लीग 2024 में अपने करियर की दूसरी सर्वश्रेष्ठ थ्रो दर्ज की। ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता और विश्व चैंपियन नीरज ने 88.67 मीटर थ्रो किया। यह प्रदर्शन उन्हें शीर्ष खिलाड़ियों में शामिल करता है और आने वाले बड़े प्रतियोगिताओं के लिए उनकी तत्परता दर्शाता है।