लोकसभा प्रो-टेम स्पीकर: क्या होता है और क्यों जरुरी है

नई लोकसभा के पहले सत्र में आप अक्सर एक प्रो-टेम स्पीकर देखते हैं। यह पद छोटा लगता है, लेकिन काम बहुत महत्वपूर्ण होता है। प्रो-टेम स्पीकर का मुख्य काम नये चुने गए सांसदों को शपथ दिलाना और नए स्पीकर के चुनाव की प्रक्रिया कराना होता है।

नियुक्ति कैसे होती है?

सरल भाषा में: चुनाव के बाद सरकार राष्ट्रपति को प्रो-टेम स्पीकर का नाम सुझाती है और राष्ट्रपति उसे नियुक्त करते हैं। सामान्य प्रथा यह है कि सबसे वरिष्ठ सदस्य यानी उम्र के हिसाब से अनुभवी सांसद को चुना जाता है। इसका कारण ये है कि अनुभव वाले सदस्य जल्दी से नियमों के अनुसार बैठकों का संचालन कर सकें।

नियुक्ति आमतौर पर पहले सत्र के तुरंत पहले होती है, ताकि नए सांसदों के शपथ लेने और स्पीकर के चुनाव में देरी न हो। प्रो-टेम स्पीकर तब तक सेवा करता है जब तक नया स्पीकर चुना नहीं जाता। अक्सर यह सिर्फ कुछ दिनों से लेकर दो-तीन हफ्तों तक का समय होता है।

मुख्य जिम्मेदारियाँ और सीमाएँ

प्रो-टेम स्पीकर की जिम्मेदारियाँ सीधी और स्पष्ट हैं। सबसे पहले, वे नए सांसदों को संविधान की शपथ दिलाते हैं। फिर वे लोकसभा की प्रारम्भिक बैठक का संचालन करते हैं और स्पीकर के चुनाव के लिए प्रक्रियाएँ लागू करते हैं।

जब तक वे अध्यक्षता कर रहे होते हैं, उनके पास नियमित स्पीकर जैसी ही शक्तियाँ होती हैं — सदन में व्यवस्था बनाए रखना, नियमों के अनुसार बोलने के अधिकार देना, और वोटिंग प्रक्रियाओं को संचालित करना। पर ध्यान दें: उनका काम अस्थायी है। वे दीर्घकालिक नियम-निर्धारण या स्थायी पैनलों की स्थापना में वही भूमिका नहीं निभाते जो नियमित स्पीकर निभाते हैं।

प्रो-टेम स्पीकर पर अक्सर राजनीतिक दबाव कम रहता है क्योंकि उनका कार्यकाल छोटा होता है। इसलिए वे आम तौर पर सिर्फ शपथ और स्पीकर चुनाव पर ही फोकस करते हैं।

आप सोच रहे होंगे — क्या प्रो-टेम स्पीकर कोई अहम निर्णय ले सकता है? हाँ, जब तक वे अध्यक्षता कर रहे होते हैं, उनके निर्णय वैध होते हैं। लेकिन वे आमतौर पर नये स्पीकर के चुने जाने के बाद उन अधिकारों का इस्तेमाल नहीं करते।

अगर आप संसद की कार्रवाई पर नजर रखते हैं तो प्रो-टेम स्पीकर की भूमिका आपको रोज़मर्रा की राजनीति से अलग एक तकनीकी लेकिन जरूरी कदम के रूप में दिखेगी। नया स्पीकर चुना जाना लोकसभा की स्थिरता के लिए जरूरी है, और प्रो-टेम स्पीकर वही शुरुआती कड़ी पूरा करते हैं।

अंत में, प्रो-टेम स्पीकर का काम पारदर्शिता और अनुशासन बनाये रखना है ताकि नए सांसद बिना रुकावट के अपना अधिकार संभाल सकें। सवाल हो तो आप लोकसभा के नियम-उपनियम और पहली बैठक की कार्यवाही देख सकते हैं — वहाँ यह भूमिका साफ दिखती है।

भर्तृहरि महताब ने लोकसभा के प्रो-टेम स्पीकर के रूप में पदभार संभाला - भाजपा सांसद के लिए बड़ा सम्मान 25 जून 2024

भर्तृहरि महताब ने लोकसभा के प्रो-टेम स्पीकर के रूप में पदभार संभाला - भाजपा सांसद के लिए बड़ा सम्मान

भर्तृहरि महताब, भारतीय जनता पार्टी के सीनियर सांसद, ने 24 जून को लोकसभा के प्रो-टेम स्पीकर के रूप में शपथ ग्रहण की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में शपथ दिलाई। महताब, जो ओडिशा के पहले मुख्यमंत्री हरेकृष्ण महताब के बेटे हैं, सफ़लता से सात बार सांसद रह चुके हैं।