पासिव निवेश — कम मेहनत से धन बढ़ाने का सरल तरीका

क्या आप निवेश में रोज़ का आंकलन और ट्रेडिंग का झंझट नहीं चाहते? पासिव निवेश वही रास्ता है। सरल शब्दों में, पासिव निवेश का मतलब है ऐसी निधियों या रणनीतियों में पैसा डालना जो बाजार के किसी इंडेक्स या व्यापक मार्केट के प्रदर्शन को फॉलो करती हैं — आपको रोज़-रोज़ फैसले लेने की ज़रूरत नहीं पड़ती।

सबसे बड़ी खासियत: कम समय, कम फीस और टैक्स-फ्रेंडली अप्रोच। यह उन लोगों के लिए बढ़िया है जो काम-धाम में व्यस्त हैं या जो मार्केट टाइमिंग करने में विश्वास नहीं रखते।

किसे चुनें: इंडेक्स फंड, ETF या डायरेक्ट स्टॉक्स?

इंडेक्स फंड और ETF सबसे आम विकल्प हैं। दोनों का मकसद वही है — इंडेक्स (जैसे Nifty, Sensex या S&P 500) के रिटर्न को कॉपी करना। फर्क सिर्फ़ ये है कि ETF शेयर की तरह ट्रेड होते हैं, जबकि इंडेक्स म्यूचुअल फंड आप SIP से खरीद सकते हैं।

अगर आप शुरुआत कर रहे हैं तो इंडेक्स म्यूचुअल फंड से SIP शुरू करें — यह ऑटोमैटिक, सरल और छोटी-छोटी रकम से शुरू करने लायक है। ज्यादा नियंत्रण और intraday flexibility चाहिए तो ETF देखें। डायरेक्ट स्टॉक्स तभी चुनें जब आप किसी कंपनी को गहराई से समझते हों; यह पासिव निवेश की परिभाषा में नहीं आता।

पासिव निवेश में शुरुआत के عملي कदम

1) आपातकालीन फंड पहले रखें: 3–6 महीने के खर्च जितना नकद रखें। इसके बिना निवेश में उतार-चढ़ाव अनावश्यक तनाव देता है।

2) लक्ष्य तय करें: 5 साल, 10 साल या रिटायरमेंट — लक्ष्य तय होने पर असैट अलोकेशन साफ़ हो जाती है।

3) एसआईपी (SIP) अपनाएँ: हर महीने छोटी राशि डालने से rupee cost averaging काम करता है और भावों के उतार-चढ़ाव का असर कम होता है।

4) फीस देखिए: एक्सपेंस रेशियो कम रखें — 0.5% से कम वाले फंड बेहतर रहते हैं। उच्च फीस लंबे समय में रिटर्न चुरा लेती है।

5) रेबैलेंसिंग साल में एक बार: स्टॉक और डेट की प्रतिशतता लक्ष्य से हट जाए तो साल में एक बार रीअलाइन कर लें।

6) टैक्स और लॉन्ग-टर्म प्लानिंग: इक्विटी फंड पर LTCG और टैक्स नियम देखें; टैक्स-इफेक्टिव अकाउंट (लगातार निवेश के लिए) का हिसाब रखें।

आम गलतियाँ जो बचें: बार-बार खरीद-बेच करना, मीडिया हाइप पर तुरंत निर्णय लेना, और छोटी अस्थिरता पर घबराना। पासिव निवेश का फायदा समय और संयम में है — जल्दी रिटर्न की उम्मीद न रखें।

अंत में एक सरल काम आज कर लें: अपनी मासिक बचत का 60–80% इक्विटी इंडेक्स फंड यानी पासिव फंड में SIP से शुरू कर दें और हर साल स्थिति देखें। यह छोटी आदत सालों में बड़ा धन बना सकती है।

2025 में पासिव फंड्स का महत्त्व: निवेशकों के लिए स्मार्ट विकल्प 1 जनवरी 2025

2025 में पासिव फंड्स का महत्त्व: निवेशकों के लिए स्मार्ट विकल्प

2025 में पासिव फंड्स निवेश के नए उभरते सितारे हैं, खासकर उनके कम खर्चे, सरलता और स्थिरता के कारण। इसमें बताया गया है कि क्यों पासिव फंड्स, जो एक सूचकांक का प्रदर्शन दोहराते हैं, सक्रिय फंड्स की तुलना में अधिक फायदे प्रदान करते हैं। विशेष रूप से भारतीय बॉन्ड बाजार में, इस परिप्रेक्ष्य में यह लेख निवेशकों को पासिव फंड्स के लाभ का अवलोकन करने के लिए प्रेरित करता है।