साइबर आतंकवाद: क्या है और आपको क्यों परवाह करनी चाहिए?

एक अस्पताल की आईटी प्रणाली रैंसमवेयर से बंद हो जाए और मरीजों की सेवा ठहर जाए — यह अब कोई काल्पनिक बात नहीं। साइबर आतंकवाद ऐसे हमले हैं जिनका मकसद जनजीवन, अर्थव्यवस्था या राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुँचाना होता है। यह सिर्फ सरकारी लक्ष्य नहीं लेते; बैंक, बिजली ग्रिड, अस्पताल और मीडिया भी टार्गेट होते हैं।

साइबर आतंकवाद के स्पष्ट संकेत

किसी अटैक को पहचानना आसान नहीं, पर कुछ संकेत तुरंत ध्यान देने लायक हैं:

  • सिस्टम अचानक धीमा या लॉक हो गया है और रैंसमवेयर संदेश दिखता है।
  • महत्वपूर्ण सर्विस बंद या डेटा गायब है—बैकअप भी रिस्टोर नहीं हो रहा।
  • कई उपयोगकर्ताओं के पासवर्ड अचानक काम नहीं कर रहे या अकाउंट से अनाधिकृत ट्रांज़ैक्शन हो रहे हैं।
  • नेटवर्क ट्रैफिक में असामान्य spikes, अज्ञात सर्वरों से कनेक्शन या बाहरी कंट्रोल कमांड दिखना।
  • खबरों में किसी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हमला आना—ऊर्जा, ट्रांसपोर्ट या अस्पताल की नेटवर्क समस्याएँ।

अगर आप इनमें से कुछ देखें तो इसे मामूली तकनीकी गड़बड़ी की तरह न लें।

फौरन अपनाने योग्य सुरक्षा कदम

छोटे बदलाव बड़ी सुरक्षा दे सकते हैं। कुछ सरल, असरदार कदम:

  • सॉफ्टवेयर और ऑपरेटिंग सिस्टम समय पर अपडेट रखें—पुरानी सॉफ्टवेयर हैकर्स के लिए दरवाज़ा होते हैं।
  • मजबूत पासवर्ड + दो-चरणीय प्रमाणीकरण (MFA) सभी महत्वपूर्ण अकाउंट पर लगाएँ।
  • नियमित बैकअप रखें और बैकअप को नेटवर्क से अलग स्टोर करें ताकि रैंसमवेयर से बचा जा सके।
  • पब्लिक वाई‑फाई पर संवेदनशील काम न करें; जरूरत हो तो भरोसेमंद VPN का उपयोग करें।
  • ईमेल लिंक और अटैचमेंट पर शक रखें—फिशिंग सबसे आम तरीका है।
  • संगठन में न्यूनतम एक्सेस नीति अपनाएँ: हर उपयोगकर्ता को केवल वही अधिकार दें जो वह काम के लिए चाहिए।

बड़े संस्थानों के लिए नेटवर्क सेगमेंटेशन, एन्डपॉइंट डिटेक्शन, और नियमित पेन‑टेस्ट ज़रूरी हैं।

भारत में साइबर आतंकवाद पर कानून भी हैं: IT Act की Section 66F साइबर आतंकवाद की विवेचना करती है। राष्ट्रीय स्तर पर CERT‑In (cert-in.gov.in) और NCIIPC जैसी संस्थाएँ घटना प्रतिक्रिया और क्रिटिकल इंफ्रा सुरक्षा का काम करती हैं।

यदि आप किसी हमले के शिकार हैं तो पहले सिस्टम डिस्कनेक्ट करें, स्क्रीनशॉट और लॉग सुरक्षित रखें, और तुरंत पुलिस साइबर सेल तथा CERT‑In को रिपोर्ट करें। FIR दर्ज कराना और तकनीकी सबूत बचाकर रखना भविष्य में जांच के लिए जरूरी है।

साइबर आतंकवाद से बचाव एक बार की कोशिश नहीं, लगातार मेहनत है। छोटे‑छोटे सधे कदम—अपडेट, बैकअप और सतर्कता—कई बड़े संकट टाल सकते हैं। आप उम्मीद करते हैं कि सिस्टम कभी नहीं फेल होगा, पर तैयार रहने से नुकसान कम होता है।

Special Ops Season 2: साइबर आतंकवाद पर भिड़ेंगे हिम्मत सिंह, जुलाई 2025 में रिलीज़ 16 जुलाई 2025

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स्पेशल ऑप्स 2 का ट्रेलर रिलीज़ हो गया है जिसमें के के मेनन एक बार फिर हिम्मत सिंह की भूमिका में साइबर आतंकवाद और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से जुड़े खतरों का सामना करेंगे। यह सीरीज 11 जुलाई 2025 से JioHotstar पर उपलब्ध होगी, जिसमें नई और पुरानी टीम मिलकर हाई-टेक मिशन को अंजाम देंगी।