उपराष्ट्रपति: भूमिका, चुनाव और अधिकार

उपराष्ट्रपति भारत की संवैधानिक व्यवस्था में दूसरे नंबर का पद है। अक्सर लोग समझना चाहते हैं कि उपराष्ट्रपति केवल राष्ट्रपति का सहायक है या उसके पास अलग जिम्मेदारियाँ भी हैं। यहाँ आसान भाषा में वही बातें बताई गई हैं जो आपको तुरंत काम आएँगी।

उपराष्ट्रपति कौन होता है और किसका प्रतिनिधि?

उपराष्ट्रपति का पद राष्ट्रपति के बाद आता है। वह स्वतः ही राज्यसभा (संसद का उच्च सदन) के सभापति होते हैं। इसका मतलब: राज्यसभा की कार्यवाही का सञ्चालन और सदन की अनुशासन से जुड़ी जिम्मेदारियाँ उनसे जुड़ी रहती हैं।

क्या उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति बन जाते हैं जब राष्ट्रपति पद खाली हो? हाँ। राष्ट्रपति पद खाली होने पर या राष्ट्रपति अनुपस्थित हों तो उपराष्ट्रपति अस्थायी रूप से राष्ट्रपति के कर्तव्यों को संभालते हैं, पर स्थायी रूप से राष्ट्रपति बनना अलग प्रक्रिया है।

उपराष्ट्रपति कैसे चुना जाता है?

उपराष्ट्रपति का चुनाव एक विशेष चुनाव के जरिए होता है। इसका ईलेक्टोरल कॉलेज संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित तथा नामांकित सदस्यों से बनता है। मतदान गोपनीय होता है और एक तरह का प्राथमिकतात्मक वोट पद्धति (single transferable vote) काम में आती है।

मतदान से पहले उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करना होता है और कुछ समर्थकों के समर्थन पर नाम नामंजूर होता है। उम्मीदवार के लिए जरूरी शर्तें सरल हैं: वह भारत का नागरिक होना चाहिए और कम-से-कम 35 साल का होना चाहिए। कुछ संवैधानिक असंगतियाँ और सरकारी पद रखने वालों के लिए विशेष नियम लागू होते हैं।

अधिकांश वोटिंग प्रक्रियाएँ सदन के भीतर होती हैं और परिणाम घोषित होने के बाद नई भूमिका संभालनी होती है। उपराष्ट्रपति का कार्यकाल पांच साल का होता है और पुनर्नियुक्ति संभव है।

क्या उपराष्ट्रपति की कोई सशक्त योजनात्मक भूमिका है? सीधे-सीधे कार्यकारी शक्ति कम होती है, लेकिन वह संसद के कामकाज पर बड़ा प्रभाव रखते हैं। वे विधानसभा की बैठकें बुलाते और संचालन करते हैं, विधायिका के नियम लागू करवाते और कई बार निर्णायक भूमिका निभाते हैं जब सदन में मत बराबर होते हैं—तब उनका कास्टिंग वोट मायने रखता है।

उपराष्ट्रपति के प्रमुख अधिकारों में संसदीय संचालन, नियमों का पालन कराना, सदन की डायरियों का नियंत्रण और राष्ट्रपति की अनुपस्थितियों में संवैधानिक कर्तव्यों का पालन शामिल है। उन्हें संवैधानिक सुरक्षा और पारिश्रमिक मिलता है, पर वे नीति निर्धारण में सीधे शामिल नहीं होते—उनका काम सभापति और संवैधानिक संतुलन बनाये रखना है।

निष्कर्ष में: उपराष्ट्रपति का पद सिर्फ सम्मानजनक नहीं; यह संवैधानिक तौर पर अहम दायित्व देता है। अगर आप राजनीति या संसद की कार्यप्रणाली में रुचि रखते हैं तो उपराष्ट्रपति के चुनाव और उनके अधिकारों को समझना जरूरी है—क्योंकि वही अक्सर संसद के रोज़मर्रा के काम और संकट के समय निर्णायक साबित होते हैं।

मलावी के उपराष्ट्रपति सॉलोस चिलीमा और 9 अन्य लोगों की विमान दुर्घटना में मृत्यु 12 जून 2024

मलावी के उपराष्ट्रपति सॉलोस चिलीमा और 9 अन्य लोगों की विमान दुर्घटना में मृत्यु

मलावी के उपराष्ट्रपति सॉलोस चिलीमा और नौ अन्य लोगों की चिकांगावा पर्वत श्रृंखला में एक विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गई। इस हादसे में कुल दस लोगों की जान गई। इस दुखद घटना की जानकारी मलावी सरकार ने दी है और CBS News ने इसकी रिपोर्ट की है।