6-दिन कार्य सप्ताह: फायदे, नुकसान और कैसे लागू करें

6-दिन कार्य सप्ताह चुनने का असर कर्मचारियों और नियोक्ताओं दोनों पर पड़ता है। क्या यह उत्पादकता बढ़ाता है या थकान बढ़ाकर नुकसान कर देता है? यहाँ सीधे और उपयोगी तरीके से बताऊँगा कि कौन-कौन से मुद्दे ध्यान में रखने चाहिए और कैसे साफ नियम बनाकर संक्रमण आसान किया जा सकता है।

फायदे और नुकसान — साफ-साफ

फायदे: ग्राहक सेवा घंटों का विस्तार किया जा सकता है, शिफ्ट बंद करने पर मशीनों का उपयोग बेहतर होता है और छोटे व्यवसायों के लिए ब्रेक-डाउन जोखिम कम रहता है। 6 दिन होने पर काम बाँट कर कई कर्मचारियों को अपराह्न या शाम की शिफ्ट दी जा सकती है, जिससे फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ती है।

नुकसान: अगर कुल साप्ताहिक घंटे बढ़ते हैं तो थकावट, बीमारियाँ और घर-परिवार पर असर बढ़ता है। ओवरटाइम भुगतान, कानूनी अनुपालन और सार्वजनिक छुट्टियों का हेंडलिंग भी जटिल हो जाता है। इसलिए योजना बिना लागू न करें।

कार्यान्वयन के व्यावहारिक कदम

1) कानूनी जांच: सबसे पहले स्थानीय लेबर लॉ और फैक्टरी/श्रम नियम देखें — जैसे अधिकतम साप्ताहिक घंटे और अधिक श्रमिकों के लिए ओवरटाइम दरें। यह अनिवार्य है वरना कानूनी समस्या आ सकती है।

2) कुल घंटे तय करें: छह दिन रखें लेकिन कुल घंटे 48 या कंपनी की नीति के अनुरूप रखें (उदाहरण: 6x8=48)। या 6x7.5=45 रखें ताकि ओवरटाइम न बढ़े।

3) शेड्यूल बनाएं: रोटेशन शिफ्ट अपनाएँ—हर कर्मचारी को हर हफ्ते एक अलग हफ्ते वाला दिन आराम दिया जाए ताकि किसी पर लगातार काम का बोझ न पड़े। पीक-घंटों पर स्टाफ बढ़ाने के लिए पार्ट-टाइम भी रखें।

4) आराम और ब्रेक्स: हर शिफ्ट में अनिवार्य ब्रेक्स और हफ्ते में कम-से-कम एक पूरा दिन अवकाश सुनिश्चित करें। मानसिक स्वास्थ्य के लिए छुट्टियों की संख्या और अवकाश पालिसी स्पष्ट रखें।

5) वेतन और ओवरटाइम क्लियर करें: भुगतान संरचना लिखित रखें—नियमित वेतन, ओवरटाइम रेट, छुट्टी का भुगतान और सार्वजनिक छुट्टियों का प्रावधान। इससे कर्मचारी विश्वास बढ़ता है।

6) मापें और समायोजित करें: पहले 3-6 महीने पायलट चलाएँ और KPIs जैसे उत्पादकता, अनुपस्थिति, कर्मचारी से संतुष्टि आंकड़ों से मूल्यांकन करें। जरूरी बदलाव तुरंत करें।

कर्मचारी के लिए टिप्स: अपने काम के घंटे रिकॉर्ड रखें, ब्रेक का पूरा उपयोग करें, और मैनेजमेंट से लचीलापन मांगें जब पारिवारिक जरूरतें हों। नियोक्ता के लिए टिप्स: पारदर्शिता रखें, ओवरटाइम समय पर भरें और स्वास्थ्य-समर्थन (चिकित्सा जांच, काउंसलिंग) दें।

6-दिन सप्ताह हर कंपनी के लिए एक जैसा नहीं काम करता। छोटे बदलाव, स्पष्ट नियम और लगातार निगरानी से आप असर कम और लाभ ज्यादा कर सकते हैं। शुरू करने से पहले छोटे पायलट और कानूनी सलाह लेना सबसे अच्छा कदम होगा।

नारायण मूर्ति: कार्य-जीवन संतुलन पर विचारों में अटल, 6-दिन कार्य सप्ताह की वकालत 15 नवंबर 2024

नारायण मूर्ति: कार्य-जीवन संतुलन पर विचारों में अटल, 6-दिन कार्य सप्ताह की वकालत

इन्फोसिस के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति ने कार्य-जीवन संतुलन के प्रति सुझावों को अस्वीकार करते हुए भारत की प्रगति के लिए समर्पण व कठिन परिश्रम की आवश्यकता पर जोर दिया। मूर्ति का मानना है कि युवाओं को 70 घंटे प्रति सप्ताह काम करके देश की प्रगति में योगदान देना चाहिए। उन्होंने अपने खुद के लंबे कार्य घंटों और विश्व में प्रतिस्पर्धा का सामना करने की कहानी साझा की।