अडिवासी अधिकार: आपकी जमीन, जंगल और अधिकारों की ताज़ा खबरें
अडिवासी अधिकार पर खबरें अक्सर जमीन, जंगल और विकास परियोजनाओं से जुड़ी होती हैं। क्या आपके इलाके में खनन, बांध या औद्योगिक योजना से सटी रिपोर्ट्स आ रही हैं? यहाँ हम वही खबरें और पृष्ठभूमि दे रहे हैं जो सीधे आपके अधिकार को प्रभावित करें।
कौन से कानून और संस्थाएँ मायने रखते हैं?
तीन चीज़ें हमेशा काम आती हैं: जंगल अधिकार (Scheduled Tribes and Other Traditional Forest Dwellers (Recognition of Forest Rights) Act, 2006), PESA (Panchayats Extension to Scheduled Areas Act, 1996) और पंचायती राज व्यवस्था/Gram Sabha की मंशा। ये कानून ग्राउंड पर जमीन और संसाधन के अधिकार तय करते हैं। जिला प्रशासन, राज्य वन विभाग और नेशनल कमीशन फॉर ST/SC फैसलों का क्रियान्वयन देखता है।
अगर आपको लगता है कि आपके समुदाय के अधिकारों की अनदेखी हो रही है, तो सबसे पहले Gram Sabha के रिकॉर्ड, forest rights के आवेदन और उनके रिजेक्शन के कारण देखें। ये दस्तावेज़ बहस और कानूनी कदम में मदद करते हैं।
ठोस कदम — आप क्या कर सकते हैं?
पहला: अपने Gram Sabha की बैठकें और उनके प्रस्ताव देखें। दूसरा: Forest Rights Act के तहत आवेदन की कॉपी रखें और समयसीमा नोट करें। तीसरा: अगर विस्थापन पर निर्णय हुआ है, तो समुचित मुआवजा, पुनर्वास और रोज़गार की शर्तें माँगें।
कानूनी मदद चाहिए? राज्य के Tribal Welfare विभाग या मानवाधिकार संगठन से संपर्क करें। छोटे-छوٹे कदम असरदार होते हैं — स्थानीय NGOs से शिकायत दर्ज कराना, मीडिया कवर लेना, और RTI से जरूरी दस्तावेज़ माँगना। जन संकट में फोटो, वीडियो और गवाह जमा रखें।
मीडिया कैसे मदद कर सकता है? सही और संतुलित रिपोर्टिंग से दबाव बनता है। पत्रकारों से कहें कि वे Gram Sabha के बयान, सरकारी नोटिस और प्रभावित परिवारों के बयान समान महत्व दें।
जन समाचार पोर्टल पर आप इस टैग को फॉलो करके ताज़ा अपडेट पा सकते हैं — नयी नीतियाँ, कोर्ट के फ़ैसले, धरने और स्थानीय कहानियाँ। हम खबरों के साथ संदर्भ भी देते हैं ताकि आप समझ सकें कि किसी घटना का कानूनी और सामाजिक मतलब क्या है।
अंत में एक सवाल: अगर आपके इलाके में कोई योजना चालू है तो आपने आखिरी Gram Sabha कब देखी थी? ज़्यादातर विवाद वहीं सुलझ सकते हैं। खबरें पढ़ें, दस्तावेज़ इकट्ठा करें और समुदाय में चर्चा बढ़ाएँ — यही असली शुरुआत है।
प्रोफेसर जी. एन. साईबाबा के संघर्ष और मानवाधिकारों के प्रति समर्पण को याद करते छात्र और शिक्षक
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में छात्रों और शिक्षकों ने प्रोफेसर जी. एन. साईबाबा को श्रद्धांजलि दी, जो एक प्रसिद्ध विद्वान और मानवाधिकार कार्यकर्ता थे। उन्हें 2014 में माओवादी लिंक के आरोप में गिरफ्तार किया गया और 2024 में अंततः बरी किया गया। इस सभा में उनके संघर्षों और समाज में उनके योगदान को याद किया गया।