आतंकवाद के खिलाफ भारत
आतंकवाद का खतरہ सिर्फ सैनिक कार्रवाई नहीं है। भारत की रणनीति में खुफिया साझेदारी, सख्त कानून, सीमा सुरक्षा और समुदाय-आधारित पहल सब शामिल हैं। हाल के वर्षों में आतंकवाद के स्वरूप में बदलाब आया है—हिंसा से लेकर साइबर-आधमक तक—इसलिए प्रतिक्रिया भी बहु-आयामी होनी चाहिए।
कठोर कानूनी कदम और जाँच एजेंसियाँ
कानूनी फ्रेमवर्क में UAPA जैसी एक्टिविटी रोकने वाली धाराएँ और NIA जैसी विशेष जांच एजेंसियाँ मुख्य भूमिका निभाती हैं। इंटेलिजेंस का काम IB और RAW करते हैं, जबकि आपरेशन-लेवल पर NSG और किस तरह की सीमावर्ती सुरक्षा BSF, ITBP और SSB रहती है। जब मामला आतंकी फंडिंग या अंतरराष्ट्रीय लिंक का होता है तो भारत विदेशों के साथ इंटेल साझेदारी और एक्स्ट्राडिशन उठाता है।
साइबर आतंकवाद बढ़ रहा है—डाटा चोरी, रैन्समवेयर या इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला। इस दिशा में CERT-In, NCIIPC और साइबर कानून सक्रिय हैं। बैंकिंग और फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन मॉनिटरिंग से भी फंडिंग रोकने की कोशिश होती है।
ऑपरेशन, सीमा सुरक्षा और स्थानीय पहल
आतंकियों के ठिकानों पर सीधा हमला तभी संभव होता है जब इंटेल ठीक से मिलती है। इसलिए फौजी और पुलिस ऑपरेशन्स इंटेल के साथ कोऑर्डिनेटेड होते हैं। बॉर्डर पर इलेक्ट्रॉनिक निगरानी, ड्रोन और पैट्रोलिंग बढ़ाई जाती है ताकि घुसपैठ रोकी जा सके।
स्थानीय स्तर पर पुलिस-समुदाय संबंध, स्कूलों में चेतावनी, और सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं का मुकाबला बहुत असरदार होता है। कुछ जगहों पर पुनर्वास और डेरैडिकलाइज़ेशन प्रोग्राम भी चल रहे हैं ताकि प्रभावित युवाओं को मुख्यधारा में लाया जा सके।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी जरूरी है—इंटेल शेयरिंग, सीमाओं पर संयुक्त ऑपरेशन और आतंकवाद फंडिंग पर कड़े पाबंदियाँ। ऐसे कदमों से क्रॉस-बॉर्डर खतरों को कम किया जा सकता है।
खास बात यह है कि सरकार के उपायों के साथ-साथ आम नागरिकों की जागरूकता भी निर्णायक होती है। क्या आप गलत या संदिग्ध पोस्ट देखते हैं? क्या किसी अज्ञात व्यक्ति की ओर से पैसा भेजने का अनुरोध किया जा रहा है? ऐसे संकेत रिपोर्ट करना सुरक्षा में बड़ा फर्क डालता है।
नागरिकों के लिए कुछ सरल सुझाव: किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत लोकल पुलिस या राष्ट्रीय इमरजेंसी नंबर 112 पर दें; अनसर्टिफाइड लिंक या फॉरवर्डेड मैसेज शेयर न करें; अगर काम पर या सार्वजनिक जगह पर अजीब व्यवहार देखे तो दूरी बनाए रखें और रिपोर्ट करें; ऑनलाइन पासवर्ड और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का उपयोग करें।
भारत का आतंकवाद विरोधी ढांचा लगातार विकसित हो रहा है—कानून, तकनीक और समुदाय आधारित उपाय मिलकर सुरक्षा बढ़ाते हैं। आप भी सतर्क रहें और जानकारी साझा करने से पहले सत्यापित करें; छोटी रिपोर्ट भी कभी-कभी बड़ी घटना रोक सकती है।
मुंबई आतंकी हमले की 16वीं वर्षगांठ पर राष्ट्रपति मुर्मू और नेताओं ने शहीदों को किए श्रद्धांजलि अर्पित
26/11 मुंबई आतंकी हमलों की 16वीं वर्षगांठ पर, जिसमे 166 लोग मारे गए और 300 से ज़्यादा घायल हुए थे, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नेतृत्व करते हुए दिल्ली व देशभर में शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। भारतीय सुरक्षा बलों की बहादुरी और बलिदान को याद कर, सह मृत्युओं की याद में मुंबई में पुलिस स्मारक समेत कई जगहों पर समारोह का आयोजन किया गया।