भैसे (भैंस) — पालन से लेकर बाजार तक उपयोगी जानकारी
क्या आप भैंस पालने का सोच रहे हैं या अपने दूध उत्पादन को बढ़ाना चाहते हैं? भैसे यानी भैंस भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। सही नस्ल, संतुलित खानपान और समय पर वैक्सीनेशन से आपकी आमदनी मज़बूत हो सकती है। नीचे सीधी और काम की जानकारी दे रहा/रही हूँ जिसे आप आज ही लागू कर सकते हैं।
भैसे की नस्लें और दूध उत्पादन
सबसे पहले नस्ल चुनना ज़रूरी है। मैसूस किस्में हैं — बिहार और उत्तर प्रदेश में काम आने वाली जर्सी-मिश्रित नस्लें, मुरrah जैसे शीशे और नीलगिरी क्षेत्रों में बेहतर दूध देती हैं। मुर्रा (Murrah) और जर्सी क्रॉस पर भरोसा किया जाता है — मुर्रा की उच्च दूध क्षमता और बेहतर फैटलिटी है।
दूध उत्पादन पर असर डालने वाली बातें: उसन (age), चारा-क्वालिटी, टूथ-कंडीशन, ब्रीडिंग टाइमिंग। एक स्वस्थ भैंस से रोज़ाना 6–12 लीटर तक सामान्य उत्पादन मिल सकता है, जबकि बेहतर प्रबंधन में यह इससे अधिक भी हो सकता है।
देखभाल, खानपान और बीमारी के संकेत
भैंस का खानपान सरल रखें: हरे चारे, सूखा चारा (खरपतवार, भूसा) और ऊर्जा/प्रोटीन युक्त सप्लीमेंट। दूध बढ़ाने के लिए प्रोटीन पर ध्यान दें — मूंग, बाजरा, सरसों का ठेकुआ जैसी चीज़ें मददगार हैं। पानी हमेशा साफ और भरपूर रखें।
हाउसिंग: छाया और सूखी जगह जरूरी है। गर्मी में वेंटिलेशन हो और सर्दी में ब्लडप्रूफ बेड। फर्श रोलिंग से बचाएं, क्योंकि इससे पाँव व हड्डियों को चोट लग सकती है।
बीमारी के संकेत जल्दी पहचाने: खाने-पीने में कमी, बुखार, गडबड़ मल, दूध में कमी या रंग बदलना। ऐसे लक्षण दिखें तो स्थानीय पशु चिकित्सक से तुरंत संपर्क करें। नियमित वैक्सीनेशन (बोटुलिज्म, रैबीज, ब्लू-टंग आदि जहाँ लागू हो) और परजीवी नियंत्रण (डिपिंग/ड्रॉप) न भूलें।
ब्रीडिंग टिप्स: ओव्यूलेशन टाइम पर ध्यान दें — सही समय पर एआई (आर्टिफिशियल इन्नसेमिनेशन) या प्राकृतिक ब्रीडिंग करें। बेहतर कल्चर और महिलाओं की कंडिशन पर फोकस करें ताकि एक बार में स्वस्थ बछड़ा मिले।
बाजार और आर्थिक पहलू: दूध के भाव, निकटतम डेयरी यूनियन और कलेक्शन सेंटर आपके मुनाफे को प्रभावित करते हैं। पके हुए बछड़ों की बिक्री, दूध से बने उत्पाद (घी, पनीर) और निचले चक्र में प्रोडक्टिविटी बढ़ाकर आय बढ़ सकती है। सरकारी सब्सिडी और पशु कल्याण योजनाओं की जानकारी स्थानीय ब्लॉक या पंचायत से लें।
त्वरित चेकलिस्ट:
- नस्ल चुनें: मुर्रा/जर्सी क्रॉस पर ध्यान दें
- नियमित वैक्सीनेशन और दवा
- संतुलित आहार + साफ पानी
- साफ और सूखा आश्रय
- दूध संग्रह और स्थानीय बाजार की जानकारी रखें
अगर आप नए हैं तो छोटे स्तर से शुरू करके अनुभव बढ़ाइए। सवाल हैं? अपने इलाके की नस्ल और बाजार भाव बताइए — मैं प्रैक्टिकल सुझाव दे दूँगा/दे दूँगी।
मुंबई के देओनार मंडी में ईद-उल-अजहा का जश्न: बकरों और भैसों की धूम
मुंबई के देओनार मंडी में ईद-उल-अजहा के अवसर पर उत्सव का माहौल है। इस बार मंडी में 1.47 लाख से अधिक बकरे और हजारों भैसे व्यापार के लिए आए हैं। बीएमसी ने भैसों के वध के लिए स्लॉट बुकिंग सुविधा का भी प्रावधान किया है, लेकिन केवल पांच लोगों ने इसका उपयोग किया है। आगामी तीन दिनों में 10,000 से अधिक भैसों के वध की संभावना है। पिछले साल इसी अवधि में 14,000 से 15,000 भैसों का वध हुआ था।