ईद-उल-अजहा: तिथि, क़ुर्बानी के नियम और व्यवहारिक सुझाव
ईद-उल-अजहा मुसलमानों का बड़ा त्योहार है और इसे हज के दिनों के साथ मनाया जाता है। तारीख हर साल चांद के हिसाब से बदलती है, इसलिए स्थानीय मस्जिद या इस्लामी मामलों वाले विभाग की घोषणा देख लें। तैयारी में समय रहते योजना बनाना आसान बनाता है — जानवर की बुकिंग, नमाज़ की जानकारी और दान का फैसला पहले कर लें।
क़ुर्बानी कैसे करें — सरल कदम
क़ुर्बानी करने से पहले कुछ बुनियादी बातें याद रखें। जानवर स्वस्थ और परिपक्व होना चाहिए; चोट या बीमारी न हो। स्थानीय धार्मिक अधिकारियों या भरोसेमंद धर्मार्थ संस्थान से नियम पूछ लें — अलग- अलग मुल्कों में नियम अलग हो सकते हैं।
क़दम-दर-क़दम तरीका:
- जानवर चुनें: गाय, भैंस, ऊँट, बकरा या भेड़।
- उम्र और हालत जाँचें: जानवर परिपक्व और स्वस्थ होना चाहिए।
- क़ुर्बानी की नीयत करें और सही समय पर करें — आम तौर पर ईद की सुबह नमाज़ के बाद।
- धर्मशास्त्र के अनुसार जाँचें कि काटने वाला कुशल हो और पशु को तेज़-सी-सुंदर तरीके से दर्द कम करके काटा जाए।
- मांस का बंटवारा सोचें: आम तौर पर परिवार, रिश्तेदार और जरूरतमंदों में बाँटते हैं।
सुरक्षा, स्वच्छता और दान के टिप्स
हाफ़िज और स्वास्थ्य नियमों का पालन करें। मांस संभालते समय पीपीई (दस्ताने) पहनें, हाथ धोएं और कच्चे मांस को सही तापमान पर रखें। यदि आप घर पर काटते हैं तो ठोस सफाई और गंदगी न फैलने दें; स्थानीय कचरा प्रबंधन के निर्देश मानेँ।
दान करने के कई तरीके हैं — आप खुद मांस बाँट सकते हैं या विश्वसनीय धर्मार्थ संस्था को दे सकते हैं जो स्थानीय जरूरतमंदों तक पहुंचाती है। संस्थान चुनते वक्त रसीद, ट्रैकिंग और पिछले काम की जानकारी देखें।
तय बजट बनाएं: क़ुर्बानी की कीमतें पहले से बढ़ सकती हैं। जानवर की बुकिंग और ट्रांसपोर्ट के खर्च जोड़कर कुल राशि तय कर लें। भीड़ से बचने के लिए कटिंग और वितरण का समय बाँट लें — इससे संक्रमण या दुर्घटना का खतरा कम होता है।
ईद के दिन नमाज़ के लिए कुछ आसान सुझाव: सुबह जल्दी निकलें, प्रayer मैट या चादर साथ रखें, हल्का और आरामदायक कपड़ा पहनें, और मस्जिद की घोषणा के अनुसार समय पर पहुंचें। बच्चों को साथ ले जाते हैं तो पानी और हल्का नाश्ता साथ रखें।
इको-फ्रेंडली तरीके अपनाएं: हड्डियों और अवशेषों को खाद में बदलें या स्थानीय पशुपालकों को दे दें। बेकार प्लास्टिक उपयोग कम करें और बचे हुए खाने को बांट दें।
अगर आप शहर से दूर हैं या जानवर खरीदना मुमकिन नहीं है, तो भरोसेमंद एनजीओ के जरिए क़ुर्बानी कराना अच्छा विकल्प है। ऑनलाइन भुगतान के बाद डाक्यूमेंट्स और वितरण रिपोर्ट मांगें।
ईद-उल-अजहा का हिस्सा इबादत के साथ इंसानियत भी है — मांस बाँटना और जरूरतमंदों का ख्याल रखना असल मकसद है। अपनी तैयारी शांत और योजनाबद्ध रखें, ताकि त्योहार श्रद्धा और मानवीयता के साथ मनाया जा सके।
मुंबई के देओनार मंडी में ईद-उल-अजहा का जश्न: बकरों और भैसों की धूम
मुंबई के देओनार मंडी में ईद-उल-अजहा के अवसर पर उत्सव का माहौल है। इस बार मंडी में 1.47 लाख से अधिक बकरे और हजारों भैसे व्यापार के लिए आए हैं। बीएमसी ने भैसों के वध के लिए स्लॉट बुकिंग सुविधा का भी प्रावधान किया है, लेकिन केवल पांच लोगों ने इसका उपयोग किया है। आगामी तीन दिनों में 10,000 से अधिक भैसों के वध की संभावना है। पिछले साल इसी अवधि में 14,000 से 15,000 भैसों का वध हुआ था।