कार्य-जीवन संतुलन: छोटे कदम, बड़ा फर्क
क्या हर दिन घर और ऑफिस के बीच धक्का होता लगता है? कार्य-जीवन संतुलन सिर्फ एक आदर्श बात नहीं — सही आदतों से यह रोज़मर्रा की जीत बन सकती है। नीचे दिए गए तरीके सीधे लागू करने लायक हैं और आपकी ऊर्जा, ध्यान और परिवार को फायदा देंगे।
दिनचर्या और समय प्रबंधन
समय को छोटे-छोटे ब्लॉक्स में बाँटिए। उदाहरण के लिए, सुबह 9–11 का ब्लॉक गहरी काम (focused work) के लिए रखें, दोपहर में 1–2 बजे ईमेल चेक करें और शाम को 5–6 बजे मीटिंग्स ही रखें। यह "टाइम-ब्लॉकिंग" तरीका आपको मल्टीटास्किंग कम करने और काम तेज़ी से पूरा करने में मदद करेगा।
एक छोटा सा नियम अपनाएँ: अगर कोई काम 15 मिनट से कम लेता है तो वहीं कर लें। इससे चोटी के काम इकट्ठे नहीं होंगे। और हाँ, काम की शुरुआत में एक प्राथमिकता सूची बनाइए — तीन सबसे महत्वपूर्ण काम तय करें और इन्हें पूरे करने पर ही दूसरों पर जाएँ।
सीमाएँ बनाना और "ना" कहना
कार्य-जीवन संतुलन में सबसे बड़ा फर्क सीमाएँ बनाने से आता है। काम के घंटे तय कर लें और उसके बाहर नोटिफिकेशन सीमित करें। उदाहरण: "मैं शाम 8 बजे के बाद वर्क ईमेल नहीं देखता/देखती" — इसे घर पर साफ बोल दें।
"ना" कहने का अभ्यास करें। नया प्रोजेक्ट लेते समय यह पूछें: क्या यह मेरे प्राथमिक कामों को प्रभावित करेगा? अगर हाँ, तो शर्तें तय करके या कुछ जिम्मेदारियाँ सौंपकर ही सहमति दें। हर काम पर हाँ कहना आपको थका देगा और परिवार के साथ समय भी छिन जाएगा।
- वर्क-ऑफर: सीमित समय कहें — "मैं इस पर अगले हफ्ते देखता/देखती हूँ"।
- मीटिंग्स: एजेंडा मांगे और केवल जरूरी लोगों को बुलाएँ।
- डेली-राइटर: दिन का एक छोटा टाइम-ब्लॉक सिर्फ प्रोएक्टिव काम के लिए रखें।
छोटे बच्चों या बुजुर्ग परिवार के साथ रहने वाले लोग शिफ्ट्स और काम के समय साझा करके बेहतर संतुलन बना सकते हैं। ऑफिस में आप सहकर्मियों से काम बाँटकर भी समय बचा सकते हैं।
तनाव कम करने के रोज़ाना छोटे अभ्यास भी बहुत असर करते हैं: 10 मिनट की वॉक, 5 मिनट की गहरी साँसें, या रात में स्क्रीन-ऑफ टाइम रखें। नींद पर कटौती न करें — 7 घंटे की नियमित नींद आपकी उत्पादकता और मूड दोनों सुधारती है।
हफ्ते में कम से कम एक दिन डिजिटल डिटॉक्स या आधा दिन ऑफ करें — फोन, ईमेल और काम के नोटिफिकेशन बंद रखें। यह आपका दिमाग रीचार्ज करता है और रचनात्मकता लौटाती है।
आप सीधे क्या कर सकते हैं: आज एक काम चुनें जिसे आप अगले 2 दिनों में "ना" कहकर बचाएंगे। छोटे बदलाव जल्दी असर दिखाते हैं। क्या आप कौन-सा नियम आज अपनाएंगे?
नारायण मूर्ति: कार्य-जीवन संतुलन पर विचारों में अटल, 6-दिन कार्य सप्ताह की वकालत
इन्फोसिस के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति ने कार्य-जीवन संतुलन के प्रति सुझावों को अस्वीकार करते हुए भारत की प्रगति के लिए समर्पण व कठिन परिश्रम की आवश्यकता पर जोर दिया। मूर्ति का मानना है कि युवाओं को 70 घंटे प्रति सप्ताह काम करके देश की प्रगति में योगदान देना चाहिए। उन्होंने अपने खुद के लंबे कार्य घंटों और विश्व में प्रतिस्पर्धा का सामना करने की कहानी साझा की।