यमुना नदी: स्रोत, मार्ग और आज की चुनौतियाँ
यमुना नदी भारत की प्रमुख नदियों में से एक है। यमुनोत्री (उत्तराखंड) के ग्लेशियर से निकलकर यह कई राज्यों से गुजरती है और अंततः गंगा में मिलती है। मार्ग में आने वाले शहर—जैसे दिल्ली, मथुरा और आगरा—न केवल नदी पर निर्भर हैं बल्कि उसे दबाव भी देते हैं।
यमुना का भौगोलिक परिचय और उपयोग
यमुना उत्तराखंड से निकलकर हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के हिस्सों से होकर बहती है। रास्ते में इसके बड़े सहायक नदियाँ और नहरें कृषि, पेयजल और शहरी आपूर्ति के लिए इस्तेमाल होती हैं। क्या आप जानते हैं कि मथुरा-वृंदावन का धार्मिक महत्व भी यमुना से जुड़ा है? कई ऐतिहासिक शहर इसी नदी के किनारे बसते आए हैं।
किसान सिंचाई के लिए यमुना के पानी पर निर्भर हैं, और शहरों में पीने-खाने से लेकर उद्योगों तक के लिए भी यही पानी जाता है। यही उपयोग कभी-कभी नदी के लिए खतरा भी बन जाता है—क्योंकि जल का सही प्रबंधन न होने पर पानी कम और गंदा हो जाता है।
प्रदूषण: वजहें और असल समस्या
यमुना के प्रदूषण के मुख्य कारण हैं बिना सीवेज ट्रीटमेंट के मल-जल का नदी में जाना, औद्योगिक जल-निकासी और अवैध निर्माण व नदी तटों पर अतिक्रमण। दिल्ली के हिस्से में स्थिति सबसे खराब मानी जाती है क्योंकि यहाँ चैनल और नाले सीधे नदी में मिल जाते हैं।
सरकारी परियोजनाएँ—जैसे यमुना एक्शन प्लान और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) —लगे हैं, पर उनकी क्षमता और क्रियान्वयन अक्सर अपर्याप्त रहा है। एनजीटी और स्थानीय अदालतें कई बार आदेश दे चुकी हैं, पर जमीन पर असर धीरे दिखता है।
क्या हम कुछ कर सकते हैं? बिलकुल। छोटे-छोटे कदम भी फर्क डालते हैं।
पहला कदम: गंदगी नदी में न डालें। धार्मिक उत्सवों में प्लास्टिक मूर्तियाँ और फूल सीधे नदी में न फेंके—स्थानीय विसर्जन केंद्र और नियम हैं, उनका पालन करें। दूसरा: जल बचाएँ और जल अपशिष्ट को सही तरीके से निपटाएं—घर में सदा सीवेज कनेक्शन सही रखें। तीसरा: स्थानीय सफाई अभियानों में हिस्सा लें या समर्थन दें। चौथा: स्थानीय प्रतिनिधियों से मांग करें कि सीवरेज और औद्योगिक effluent का कड़ा निगरानी तंत्र रखें।
यमुना की सफाई सिर्फ सरकार का काम नहीं है—समुदाय, उद्योग और नागरिक मिलकर बदलाव लाएँ। अगर आप पर्यटक हैं, तो नदी के किनारे शांति बनाए रखें और कूड़ा न फेंके। अगर आप किसान या उद्योगी हैं, तो जल उपयोग और निकासी के आधुनिक तरीके अपनाएँ।
यमुना का सांस्कृतिक और आर्थिक योगदान बड़ा है। उसे बचाने का मतलब हमारी अगली पीढ़ी के लिए साफ पानी, खेती और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखना है। छोटा कदम, बड़ा फर्क—आज ही अपनी आदत बदलें और यमुना को फिर से जिंदा देखें।
दिल्ली जल संकट: रिकॉर्ड तापमान के बीच उप्र और हरियाणा से जल की मांग
दिल्ली में रिकॉर्ड तापमान के कारण गंभीर जल संकट उत्पन्न हुआ है। यमुना नदी का जल स्तर 670.3 फीट तक गिर गया है, जो सामान्य स्तर से 4.2 फीट नीचे है। दिल्ली के जल मंत्री आतिशी ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों से अतिरिक्त जल की मांग की है।