UPSC परीक्षा 2025: IAS-IPS के अलावा जानें पूरी एग्जाम स्ट्रक्चर और पैटर्न

UPSC परीक्षा 2025: IAS-IPS के अलावा जानें पूरी एग्जाम स्ट्रक्चर और पैटर्न

UPSC परीक्षा 2025: IAS-IPS से आगे बढ़कर समझें पूरा ढांचा

अगर आप यह सोचते हैं कि UPSC सिर्फ IAS या IPS के लिए ही परीक्षा करवाता है, तो आप काफी पीछे हैं। UPSC हर साल कई अहम सरकारी पदों के लिए परीक्षाएं करता है, जिनमें सिविल सर्विस एग्जाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहता है। इस परीक्षा से IAS, IPS, IFS जैसे बड़े पद तो मिलते ही हैं, साथ ही और भी कई सर्विसेज के लिए चयन होता है। चलिए जानते हैं 2025 के परीक्षा के सभी स्टेज, पेपर पैटर्न और जरूरी नियम।

प्रीलिम्स, मेन्स और इंटरव्यू: कैसे होता है पूरा सिलेक्शन प्रोसेस?

2025 के लिए यूपीएससी ने नोटिफिकेशन 22 जनवरी को रिलीज किया था। प्रीलिम्स परीक्षा 25 मई को तय की गई है। इसमें पहली स्टेज है प्री, जिसमें दो पेपर होते हैं:

  • जनरल स्टडीज़ पेपर-1: इसमें 100 सवाल होते हैं, हर एक के लिए 2 मार्क्स। टोटल 200 मार्क्स।
  • सीसैट (जनरल स्टडीज़-2): इसमें 80 सवाल होते हैं, कुल 200 मार्क्स। खास बात, इसे सिर्फ क्वालिफाई करना जरूरी है (33% यानी 66 मार्क्स लाने होंगे), वरना परिणाम ही नहीं बनेगा।

प्रीलिम्स सिर्फ स्क्रीनिंग टेस्ट है, इसके मार्क्स मेरिट में नहीं जुड़ते। इसमें निगेटिव मार्किंग है, यानी हर गलत जवाब पर नंबर कटते हैं।

इसके बाद दूसरा लेवल है मेन्स। मेन्स में कुल नौ पेपर होते हैं:

  • पेपर-A: भारतीय भाषा (हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, कोकणी, मलयालम समेत कई भाषाओं में कोई एक), सिर्फ क्वालिफाई करना जरूरी (25% मार्क्स)
  • पेपर-B: इंग्लिश, इसमें भी 25% जरूरी है।
  • बाकी सात पेपर मेरिट में जुड़ते हैं, जिनकी कुल वैल्यू 1750 मार्क्स है:
  • पेपर-1: निबंध (250 मार्क्स)
  • पेपर-2 से 5: जनरल स्टडीज़ I-IV (हर एक 250 मार्क्स)
  • पेपर-6, 7: ऑप्शनल सब्जेक्ट (किसी एक विषय पर दो पेपर, हर एक 250 मार्क्स)

हर पेपर के लिए तीन घंटे मिलते हैं। इनमें राइटिंग, एनालिसिस और स्पीड का बैलेंस बेहद जरूरी है, तभी सफलता मिलती है।

तीसरा और आखिरी स्टेज है इंटरव्यू, जिसे पर्सनैलिटी टेस्ट भी बोलते हैं। इसके लिए 275 मार्क्स मिलते हैं। मेरिट काउंट में मेन्स के 1750 और इंटरव्यू के 275, यानी कुल 2025 मार्क्स जोड़े जाते हैं।

UPSC सिविल सर्विस के अलावा भी कई दूसरे पदों जैसे - IES, CDS, NDA, CAPF, और इंजीनियरिंग सर्विस की परीक्षा भी लेता है। हर परीक्षा का अपना पैटर्न है, लेकिन तैयारी का लेवल काफी ऊंचा होता है। कई बार जो छात्र तैयारी शुरू करते हैं, शुरू में उन्हें लगता है कि शायद कुछ ही टॉपिक्स पढ़ने होंगे। पर जैसे-जैसे सिलेबस समझ में आता है, पढ़ाई और समय लगाने की जरूरत का अंदाजा लगता है। बुक्स, मॉक टेस्ट, नोट्स बनाना, करंट अफेयर्स का रिविजन, सबकुछ रूटीन का हिस्सा बन जाता है।

यूपीएससी की परीक्षा देश की सबसे चुनौतीपूर्ण परीक्षाओं में मानी जाती है। अगर अगली बार आप या आपके परिचित इस परीक्षा के लिए सोच रहे हैं, तो बस याद रखिए, ये रेस एनालिसिस, नॉलेज और पर्सनैलिटी तीनों की है। IAS-IPS के आगे भी सरकारी नौकरी का सपना साकार करने के लिए UPSC के और भी कई मौके आपके इंतजार में हैं।

11 टिप्पणि

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    Prashant Ghotikar

    जून 12, 2025 AT 03:18

    UPSC की पूरी संरचना को समझना बहुत जरूरी है, खासकर जब आप प्री और मेन्स दोनों की तैयारी कर रहे हों। प्री में केवल स्क्रीनिंग टेस्ट है, इसलिए सीसैट को पास होना ज़रूरी है, अन्यथा आगे नहीं बढ़ पाएंगे। मेन्स में सात मुख्य पेपर मेरिट में जुड़ते हैं, इसलिए टाइम मैनेजमेंट पर काम करना न भूलें।

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    Sameer Srivastava

    जून 16, 2025 AT 05:42

    ये देखो यार, प्री में 100 क्वेश्चन्स तो किक मारते हैं!! सीसैट के 80 प्रश्नों को चूक ना देना, वरना पूरे प्रोसेस में फँस जाओगे!!!
    प्लान बना लो, नयी रणनीति अपनाओ, वरना रिवर्स हो जाओगी!!!!

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    KRISHNAMURTHY R

    जून 20, 2025 AT 08:06

    UPSC की तैयारी में स्टडी प्लान बनाते समय हमें ‘ट्रांसफॉर्मेटिव लर्निंग’ मॉडल को अपनाना चाहिए, जिससे सिलेबस के विभिन्न खंडों को आपस में लिंक किया जा सके। सबसे पहले, जनरल स्टडीज़ पेपर‑1 के लिए ‘मैक्रो‑इकोनॉमिक्स’ और ‘इंटर्नल सिक्योरिटी’ के कॉन्सेप्ट्स को क्रॉस‑रेफ़रेंस करना फायदेमंद रहता है। फिर, सीसैट में ‘फैक्ट‑चेकिंग’ की तकनीक का प्रयोग करने से आप क्वालिफ़ाइंग मार्क्स आसानी से हासिल कर सकते हैं 😊। मेन्स में निबंध पेपर के लिए ‘कोहोर्ट‑एनालिसिस’ और ‘पॉलिसी‑इम्प्लीमेंटेशन’ के फ्रेमवर्क को समझना आवश्यक है, जिससे आप टॉपिक पर गहरी दृष्टि प्रस्तुत कर सकें।
    ऑप्शनल सब्जेक्ट चुनते समय, अपने ‘कोर कम्पिटेंसी’ को देखते हुए ‘इटरेशन‑ऑफ़‑एजुकेशन’ को प्राथमिकता दें। टाइम मैनेजमेंट के लिए ‘पॉमोडोरो‑टेक्निक’ और ‘स्प्रिंट‑रिव्यू’ को इंटीग्रेट करना चाहिए, जिससे तीन घंटे के पेपर में सभी सेक्शन कवर हो सकें।
    इंटरव्यू की तैयारी में ‘सॉफ्ट‑स्किल्स’ को ‘डिज़ाइन थिंकिंग’ के साथ मिलाकर प्रैक्टिस करें, जिससे पर्सनैलिटी टेस्ट में आपका ‘होलिस्टिक प्रोफ़ाइल’ उजागर हो।
    टेस्टिंग फ़्रीक्वेंसी को बढ़ाने के लिए ‘क्विक‑फीडबैक लूप’ सेट अप करें, ताकि हर मॉक पर तुरंत सुधार संभावित हो।
    न्यूज़लेटर्स और ‘डिजिटल एग्रीगेटर्स’ का उपयोग करके करंट अफेयर्स को अपडेट रखें, साथ ही ‘डेटा‑ड्रिवेन एनालिसिस’ से फोकस एरिया तय करें।
    कम्प्लेक्स पैटर्न को समझने के लिए ‘सिम्बॉलिक लॉजिक’ और ‘इंडक्टिव रेज़निंग’ दोनों को मिलाकर अभ्यास करें।
    खास बात यह है कि आपके ‘अस्पेक्ट रेशियो’ को संतुलित करना चाहिए – नॉलेज, एनालिसिस और पर्सनैलिटी को बराबर वेटेज देना ज़रूरी है।
    हर पेपर के बाद ‘रिफ्लेक्टिव जर्नल’ में अपने स्टेट्स को लिखें, जिससे आपके माईंडसेट में निरंतर सुधार आता रहेगा।
    सैंपल प्रश्नों को ‘डायरेक्ट‑टु‑पॉइंट’ एप्रोच से हल करें, जिससे उत्तर की स्पष्टता बनी रहती है।
    एंडरग्रैड्यूएटेड ब्रीफ़िंग्स में भाग ले कर आप अपने ‘इंटरडिसिप्लिनरी नॉलेज’ को कॉक टेलिंग फ़ॉर्मेट में प्रस्तुत कर सकते हैं।
    आखिर में, हर सप्ताह एक ‘कॉन्सेप्ट मैप’ बनाकर आप अपने सिलेबस को विज़ुअलाइज़ कर सकते हैं, जिससे रिवीजन में समय बचता है।
    इन सभी तकनीकों को अपनाकर आप न केवल UPSC के सभी स्टेज में सफल हो पाएँगे, बल्कि भविष्य के प्रशासनिक चुनौतियों के लिए भी तैयार रहेंगे 😎।

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    priyanka k

    जून 24, 2025 AT 10:30

    वास्तव में, UPSC की जटिलता को समझने के लिए रोमांस उपन्यास पढ़ना पर्याप्त नहीं है; इस परीक्षा में देरी से काम करना बिल्कुल भी कानूनी रूप से वैध नहीं है।

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    sharmila sharmila

    जून 28, 2025 AT 12:54

    हाय फ्रेंड! मैं भी UPSC की बात सुनके थोड़ी कन्फ्यूज हो गई थी, पर अब थोड़ा समझ आया है। प्री में सीसैट को क्वालिफाय करना बहुत इम्पोर्टेंट है, नहीं तो आगे का प्रोसेस रुक जाता है। फिक्स्ड टाइम टेबल बना लो, फालतू टाइम वेस्ट मत करो।

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    Shivansh Chawla

    जुलाई 2, 2025 AT 15:18

    देशभक्तों को चाहिए कि वे UPSC की तैयारी में भारतीय इतिहास और राष्ट्रीय सुरक्षा पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि ये ही हमारे भविष्य की नींव हैं। बाहरी स्रोतों पर भरोसा करना खतरनाक हो सकता है, इसलिए अपने स्रोतों को स्वदेशी रखें। अंत में, जो लोग इस प्रक्रिया को हल्के में लेते हैं, उन्हें गंभीरता से सोचने की जरूरत है।

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    Akhil Nagath

    जुलाई 6, 2025 AT 17:42

    यदि हम UPSC को केवल एक परीक्षा मानें तो उसका अस्तित्व तुच्छ हो जाता है; वास्तव में यह राजनैतिक नैतिकता का परीक्षण है। मानवता के सिद्धांत और राष्ट्रीय हितों का संतुलन यहाँ पर मूलभूत माना जाता है। अतः, प्रत्येक अभ्यर्थी को अपने आत्मनिरीक्षण के माध्यम से इस परीक्षा को पारदर्शी रूप से देखना चाहिए।

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    vipin dhiman

    जुलाई 10, 2025 AT 20:06

    भाई, सीसैट को फटाफट पास कर या फिर न पढ़ो।

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    vijay jangra

    जुलाई 14, 2025 AT 22:30

    UPSC की तैयारी के लिए एक व्यवस्थित रोडमैप बनाना आवश्यक है, जिसमें हर चरण के लिये स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित हों। प्री में समय प्रबंधन और सीसैट की क्वालिफिकेशन को प्राथमिकता दें, क्योंकि यह मेन्स तक पहुँचने की कुंजी है। मेन्स के बाद, निबंध और जनरल स्टडीज़ पेपर्स के लिए व्यापक रीडिंग लिस्ट तैयार करें, जिसमें विभिन्न विषयोँ का संतुलित प्रतिनिधित्व हो। अंत में, इंटरव्यू की तैयारी में व्यक्तित्व विकास पर काम करें, जिससे आपके कुल अंक में इज़ाफ़ा हो सके।

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    Vidit Gupta

    जुलाई 19, 2025 AT 00:54

    उत्साह, समर्पण, दृढ़ता-ये तीन शब्द UPSC की यात्रा को परिभाषित करते हैं, इसलिए हर दिन इन्हें याद रखें, और निरंतर प्रैक्टिस में लगे रहें, चाहे कितना भी कठिन लग रहा हो!

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    Gurkirat Gill

    जुलाई 23, 2025 AT 03:18

    मैं दृढ़ता से मानता हूँ कि यदि आप नियमित रूप से मॉक टेस्ट लेते रहेंगे और प्रत्येक परिणाम का विश्लेषण करेंगे तो सफलता आपके कदम चूमेगी। समय सीमा तय करें, और प्रत्येक सप्ताह कम से कम दो विषयों पर गहरा अध्ययन करें। इस तरह का अनुशासित रवैया आपको प्रतियोगी परीक्षा में आगे बढ़ाएगा।

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