बिहार के सरकारी स्कूल 2026 में कुल 75 दिनों तक बंद रहेंगे। ये छुट्टियाँ सिर्फ रविवार नहीं, बल्कि धार्मिक त्योहार, राष्ट्रीय अवकाश और लंबी छुट्टियों को शामिल करती हैं। बिहार शिक्षा विभाग ने अपनी वार्षिक शैक्षिक योजना के हिस्से के रूप में इस कैलेंडर की घोषणा की है, जिसमें बिहार विद्यालय परीक्षा बोर्ड (BSEB) ने सभी 38 जिलों के सरकारी स्कूलों के लिए सटीक तारीखें जारी की हैं। यह निर्णय सिर्फ एक कैलेंडर नहीं — यह बिहार की विविध सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का एक जीवंत प्रतिबिंब है।
धार्मिक त्योहारों का सम्मान: एक विविधता का नक्शा
2026 के कैलेंडर में हिंदू, मुस्लिम, सिख और अन्य समुदायों के प्रमुख त्योहारों को समान रूप से सम्मान दिया गया है। जनवरी में मकर संक्रांति (14 जनवरी), वसंत पंचमी (23 जनवरी) और गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) के साथ ही संत रविदास जयंती (1 फरवरी) और शब-ए-बरात (4 फरवरी) भी शामिल हैं। महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाया जाएगा, जबकि होली दो दिनों तक — 3 और 4 मार्च — छुट्टी का समय बनेगी।
इसी तरह, इस्लामी त्योहारों को भी पूरी गंभीरता से देखा गया है। रमजान का अंतिम शुक्रवार (13 मार्च), ईद-उल-अजहा (28 मई) और मुहर्रम (27 जून) छुट्टी के लिए निर्धारित हैं। यह बिहार के ऐसे समाज की ओर इशारा है, जहां एक ही शहर में एक दिन में दो अलग-अलग धर्म के लोग अपने-अपने त्योहार मनाते हैं।
गर्मियों की लंबी छुट्टी और दिवाली का दशक
स्कूलों के लिए सबसे बड़ी छुट्टी गर्मियों की है — 1 जून से 20 जून, 2026 तक 20 लगातार दिन। यह समय न केवल बच्चों के लिए आराम का है, बल्कि शिक्षकों के लिए पाठ्यक्रम तैयारी और प्रशिक्षण का भी मौका है।
लेकिन सबसे लंबा त्योहारी समय नवंबर में आएगा। दिवाली, छठ पूजा, भाई दूज और चित्रगुप्त पूजा का त्योहार 7 नवंबर से 17 नवंबर तक चलेगा — लगभग 10 दिनों का अवकाश। इस समय के दौरान परिवारों के घर जाने, रिश्तों को जोड़ने और गांवों में छुट्टी बिताने की परंपरा है। यह बिहार के ग्रामीण जीवन की वास्तविकता है।
अन्य महत्वपूर्ण तिथियाँ और सांस्कृतिक अवकाश
अगस्त में स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) और पैगंबर मुहम्मद (PBUH) की जयंती (26 अगस्त) के बीच कबीर जयंती (29 जून) और चैलुम (4 अगस्त) जैसे त्योहारों को भी शामिल किया गया है। यह दर्शाता है कि बिहार सरकार सिर्फ बड़े धर्मों को ही नहीं, बल्कि स्थानीय संस्कृति और सामाजिक परंपराओं को भी सम्मान देती है।
गुरु नानक जयंति और कार्तिक पूर्णिमा दोनों 24 नवंबर, 2026 को आ रही हैं — एक अद्भुत संयोग जिसे बिहार के सिख और हिंदू समुदाय एक साथ मनाएंगे। यह एक ऐसा समय है जब एक ही दिन दो धर्मों के लोग एक ही अवसर पर इकट्ठे होते हैं।
प्रभाव: 50,000 स्कूल, 1.5 करोड़ छात्र
यह कैलेंडर सिर्फ एक डॉक्यूमेंट नहीं है। यह पटना, गया, मुजफ्फरपुर और भागलपुर जैसे शहरों से लेकर दूर-दराज के गांवों तक के लगभग 50,000 सरकारी स्कूलों के लिए एक जीवन रेखा है। इसके तहत लगभग 1.5 करोड़ छात्र और 3 लाख से अधिक शिक्षक अपनी योजनाएं बनाते हैं।
प्रत्येक छुट्टी के बाद अध्यापक अपने पाठ्यक्रम को फिर से तैयार करते हैं। माताओं और पिताओं को बच्चों के लिए खाना व्यवस्था, ट्यूशन और यात्रा की योजना बनानी पड़ती है। यह कैलेंडर उनकी दैनिक जिंदगी को नियंत्रित करता है।
क्या बदलाव आएगा 2027 में?
अगले साल का कैलेंडर अगले वर्ष के अंत तक जारी किया जाएगा। लेकिन यहां एक रहस्य है — यह कैलेंडर हर साल थोड़ा बदलता है। क्योंकि धार्मिक तिथियां चंद्रमा के चक्र पर निर्भर करती हैं। इसलिए 2027 में दिवाली या होली की तारीख आज से अलग हो सकती है।
हालांकि, एक बात निश्चित है: बिहार सरकार अपने बहुसांस्कृतिक समाज के लिए छुट्टियों का कैलेंडर बनाने में अपनी भूमिका नहीं छोड़ेगी। यह एक शिक्षा की योजना नहीं, बल्कि एक सामाजिक समझ का दस्तावेज है।
क्या इसका असर निजी स्कूलों पर होगा?
निजी स्कूलों को यह कैलेंडर अनिवार्य नहीं है, लेकिन ज्यादातर निजी संस्थान भी इसे अपनाते हैं। क्योंकि यह छात्रों के लिए एक समान अवकाश अनुभव बनाता है। अगर एक स्कूल छुट्टी पर है और दूसरा नहीं, तो परिवारों को बच्चों को अलग-अलग जगह भेजना पड़ता है। यह एक असुविधा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बिहार सरकारी स्कूलों के लिए 2026 में कुल कितनी छुट्टियाँ हैं?
2026 में बिहार के सरकारी स्कूल 75 दिनों तक बंद रहेंगे। इसमें 65 दिन गैर-रविवार छुट्टियाँ शामिल हैं, जिनमें धार्मिक त्योहार, राष्ट्रीय अवकाश और लंबी छुट्टियाँ शामिल हैं। रविवार के 104 दिन अलग से गिने जाते हैं।
दिवाली के लिए कितने दिन की छुट्टी है और किन त्योहारों को शामिल किया गया है?
दिवाली के लिए 10 दिन की लगातार छुट्टी 7 नवंबर से 17 नवंबर, 2026 तक है। इसमें दिवाली, छठ पूजा, भाई दूज और चित्रगुप्त पूजा शामिल हैं। यह बिहार में सबसे लंबा त्योहारी समय है, जिसके दौरान परिवारों की यात्रा और सामाजिक गतिविधियाँ तेज हो जाती हैं।
गर्मियों की छुट्टी कब शुरू और कब खत्म होगी?
गर्मियों की छुट्टी 1 जून से 20 जून, 2026 तक रहेगी। यह एक लंबी छुट्टी है जो छात्रों को अपने गांवों में जाने, शिक्षकों को पाठ्यक्रम तैयार करने और परिवारों को बच्चों के साथ समय बिताने का मौका देती है।
क्या बिहार सरकार ने किसी नए त्योहार को इस साल जोड़ा है?
नहीं, कोई नया त्योहार नहीं जोड़ा गया है। लेकिन इस बार चैलुम (मुहर्रम के बाद का 40वां दिन) को अलग से छुट्टी के रूप में शामिल किया गया है, जो पिछले कुछ सालों में नहीं था। यह स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक पहचान है।
क्या इस कैलेंडर का असर बिहार के बाहर के स्कूलों पर होगा?
नहीं, यह कैलेंडर सिर्फ बिहार के सरकारी स्कूलों के लिए है। लेकिन अगर कोई छात्र बिहार के बाहर अध्ययन कर रहा है, तो उसके परिवार इसे अपनी यात्रा और अवकाश योजना में शामिल कर सकते हैं। कई परिवार बिहार लौटकर छुट्टी मनाते हैं।
अगले साल का कैलेंडर कब जारी होगा?
2027 के लिए कैलेंडर अगले साल के अंत, शायद नवंबर या दिसंबर 2026 में जारी किया जाएगा। यह निर्णय बिहार विद्यालय परीक्षा बोर्ड की ओर से चंद्रमा के तारीखों के आधार पर लिया जाएगा, जिससे धार्मिक त्योहारों की सटीक तारीखें तय होती हैं।
Arjun Kumar
दिसंबर 10, 2025 AT 10:2675 दिन छुट्टी? ये तो स्कूल नहीं, रिसॉर्ट है। बच्चे तो घर पर फोन में घूमेंगे, शिक्षक चाय पीते रहेंगे। क्या ये शिक्षा है या छुट्टियों का फेस्टिवल?
RAJA SONAR
दिसंबर 12, 2025 AT 05:36अरे भाई ये तो बिहार का असली अविष्कार है जहां हर त्योहार के लिए छुट्टी देना सिर्फ धार्मिक सम्मान नहीं बल्कि एक राजनीतिक गेम है जिसमें कोई भी धर्म अपने आप को ऊपर नहीं उठा सकता और ये बस एक बड़ा शो है जो लोगों को बांटता है और एक साथ रखता है
Mukesh Kumar
दिसंबर 12, 2025 AT 09:47ये बिहार की शिक्षा नीति नहीं बल्कि एक सामाजिक बंधन है। हर त्योहार पर बच्चे अपने गांव जाते हैं, दादा-दादी के साथ रहते हैं, नए रिश्ते बनाते हैं। ये शिक्षा का हिस्सा है जो किताबों में नहीं मिलता।
Shraddhaa Dwivedi
दिसंबर 13, 2025 AT 04:42मुझे बहुत पसंद है कि चैलुम को भी शामिल किया गया। ये छोटी बातें बड़ी बातें होती हैं। एक छोटे से समुदाय को भी सम्मान देना एक समाज की परिपक्वता का नाम है।
Govind Vishwakarma
दिसंबर 14, 2025 AT 00:2475 दिन छुट्टी और फिर भी बिहार के बच्चों का पढ़ाई का स्तर नीचे है। क्या ये तारीखें बदल देंगे शिक्षा की वास्तविकता? नहीं। ये सिर्फ एक फिल्म है जो लोगों को खुश करती है।
Jamal Baksh
दिसंबर 14, 2025 AT 02:53यह एक अद्भुत उदाहरण है कि कैसे एक बहुसांस्कृतिक समाज अपनी विविधता के साथ सामंजस्य बना सकता है। यह केवल एक कैलेंडर नहीं, बल्कि एक सामाजिक अनुबंध है जो सभी धर्मों को समान रूप से सम्मान देता है।
Shankar Kathir
दिसंबर 14, 2025 AT 21:15मैं बिहार के गांवों से हूँ और मैंने देखा है कि जब छठ पूजा के लिए 10 दिन की छुट्टी होती है तो शहरों से लौटे बच्चे अपने गांव के बच्चों के साथ खेलते हैं, नए गीत सीखते हैं, नए खाने के तरीके जानते हैं। ये जो स्कूल में पढ़ाया जाता है वो तो बस लिखा हुआ है, ये तो जीवन है। शिक्षा का असली अर्थ यही है।
Bhoopendra Dandotiya
दिसंबर 15, 2025 AT 13:3024 नवंबर को गुरु नानक और कार्तिक पूर्णिमा एक साथ? ये तो बिहार की अद्भुत भावना है। एक दिन दो धर्म, एक आस्था, एक ही आकाश। कभी-कभी यही विविधता हमें एक साथ बांधती है।
Firoz Shaikh
दिसंबर 16, 2025 AT 16:21इस कैलेंडर के माध्यम से बिहार सरकार ने एक ऐसा सामाजिक न्याय बनाया है जो केवल राष्ट्रीय अवकाशों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय धार्मिक और सांस्कृतिक अवसरों को भी शामिल करता है। यह एक विचारशील और संवेदनशील नीति है।
Uma ML
दिसंबर 18, 2025 AT 07:4075 दिन? ये तो बिहार की आदत है कि जितना ज्यादा छुट्टी उतना ज्यादा शासन करने का दावा। बच्चों को पढ़ाएं नहीं तो लोगों को खुश करो। ये तो एक धोखा है।
Saileswar Mahakud
दिसंबर 20, 2025 AT 02:45मेरे भाई का बेटा बिहार से है। उसने बताया कि छठ पूजा के दौरान उसके दादाजी ने उसे घाट पर जाकर दीप जलाना सिखाया। ये यादें बच्चे कभी नहीं भूलते। ये छुट्टियाँ उनकी पहचान बनती हैं।
Rakesh Pandey
दिसंबर 21, 2025 AT 17:20अच्छा हुआ कि बिहार ने ये किया। बाकी राज्यों में तो हिंदू त्योहार ही छुट्टी होते हैं। यहां तो सबको शामिल किया गया। ये बहुत बड़ी बात है।
aneet dhoka
दिसंबर 22, 2025 AT 17:20ये सब बकवास है। जब तक बिहार के स्कूलों में बिजली नहीं होगी, जब तक टीचर्स नहीं आएंगे, तब तक ये कैलेंडर बनाने का क्या फायदा? ये सब एक बड़ा धोखा है जिसके पीछे कोई निजी दलाली है।
Harsh Gujarathi
दिसंबर 23, 2025 AT 22:49ये तो बहुत अच्छा है 🙌 बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़ना बहुत जरूरी है। धन्यवाद बिहार सरकार 🙏❤️
Senthil Kumar
दिसंबर 25, 2025 AT 01:59अच्छा काम किया। छठ के लिए 10 दिन तो बहुत जरूरी है। घर जाने का मौका मिलता है।
Rahul Sharma
दिसंबर 25, 2025 AT 16:46इस कैलेंडर को देखकर लगता है कि बिहार की सरकार सिर्फ शिक्षा की योजना नहीं बना रही, बल्कि एक सांस्कृतिक न्याय की नींव रख रही है। यह एक ऐसा निर्णय है जो भविष्य की पीढ़ियों को एकजुट रखेगा।
Yogananda C G
दिसंबर 26, 2025 AT 15:0975 दिन की छुट्टी? ये तो बहुत अच्छा है! लेकिन... क्या आपने देखा कि इन छुट्टियों के बाद बच्चे वापस आते हैं तो उनकी पढ़ाई लगभग शून्य हो जाती है? और फिर शिक्षक उन्हें फिर से शुरू से पढ़ाते हैं? ये तो एक अनंत चक्र है! लेकिन फिर भी... ये छुट्टियाँ बहुत खूबसूरत हैं! 😍
Divyanshu Kumar
दिसंबर 27, 2025 AT 13:05ये कैलेंडर बिहार के लोगों के लिए एक जीवन रेखा है। धार्मिक त्योहारों को सम्मान देना एक शिक्षा नहीं, बल्कि एक सामाजिक दायित्व है। यह एक अद्भुत उदाहरण है कि कैसे एक राज्य अपनी सांस्कृतिक विविधता को शिक्षा के साथ जोड़ सकता है।