दरजीली में दुधिया इरन ब्रिज ढहने से 20 मौतों, प्रदेश में आपातकालीन डर

दरजीली में दुधिया इरन ब्रिज ढहने से 20 मौतों, प्रदेश में आपातकालीन डर
  • Nikhil Sonar
  • 6 अक्तू॰ 2025
  • 14 टिप्पणि

जब Narendra Modi, भारत के प्रधानमंत्री, ने ट्विटर पर "दरजीली में पुल के हादसे से हुई जीवन हानि से गहरा दुःख" लिखा, तब पूरे पश्चिम बंगाल को एक घातक प्राकृतिक आपदा का सामना करना पड़ा। 4-5 अक्टूबर 2025 को लगातार भारी बारिश ने हिमालयी प्रदेश में बड़े पैमाने पर दुधिया इरन ब्रिज का ढहना, कई पहाड़ी बछड़ों का बाढ़ में डूब जाना और 18‑20 मौतें कर दीं।

विनाश की पृष्ठभूमि और मौसम की स्थिति

बारिश की ताली की ध्वनि सुनते ही दरजीली जिले के पहाड़ी इलाकों में जलस्तर तेज़ी से बढ़ा। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने पहले ही 3 अक्टूबर को इस क्षेत्र के लिए "लाल चेतावनी" जारी कर दी थी, लेकिन निरंतर बढ़ती आर्द्रता ने सिंचन के बजाय बाढ़ का कलकल बना दिया। तेस्ता नदी और महानंदा नदी के किनारे की बँझरें टूट गईं, जिससे कई उपनिवेशों को तुरंत खाली करना पड़ा।

दुधिया इरन ब्रिज का ढहना और उसके बाद की आपातकालीन प्रतिक्रिया

संध्या के समय, जब तेज़ बारिश ने पहाड़ी बायें को कमजोर कर दिया, तब मीरिकदुधिया के बीच स्थित दुधिया इरन ब्रिज के मध्य भाग में तेज़ ध्वनि के साथ टुकड़े‑टुकड़े हो गया। यह पुल, जो शिलिगुड़ी‑दरजीली शह‑12 को जोड़ता है, न केवल पर्यटक गंतव्य को जोड़ता था, बल्कि स्थानीय किसानों को बाजार तक पहुँचाता था। पुल के गिरते ही सम्पूर्ण शह‑12 पर सभी वाहनां पर रोक लग गई, जिससे कई गाँवों को आपातकालीन सेवाओं से वंचित किया गया।

आफ़त के बाद, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) ने दरजीली, शिलिगुड़ी और अलिपुरदुआर से तीन विशेषीकृत टीमें भेजी। इन टीमों ने मीरिक उपखंड में ढहते पुल के पास फंसे हुए लोगों को बचाने के लिए जलमर्यादा से नीचे उतरते हुए लगभग दो सौ लोगों को救助 किया।

स्थानीय अधिकारी Preeti Goyal, जिला अधिकारी, ने मौके पर जाकर "पुल के नुक़सान का आकलन" किया और प्रोस्पेक्टिव इंजीनियरों के साथ मिलकर शीघ्र पुनर्निर्माण की योजना बनाई। उनका कहना था, "हम PWD के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर और एक्जीक्यूटिव इंजीनियर के साथ मिलकर इस पुल को जल्द से जल्द फिर से चालू करने की दिशा में काम करेंगे।"

राजनीतिक और प्रशासनिक कदम

प्रधानमंत्री के बयान के बाद, Draupadi Murmu राष्ट्रपति ने भी संजीवनी संदेश भेजा और केंद्रीय सरकार द्वारा फंड प्रदान करने की घोषणा की। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने नबन्ना में एक उच्च-स्तरीय बैठक बुलाई, जिसमें उन्होंने 24×7 कंट्रोल रूम की घोषणा की जिससे बचाव कार्यों की वास्तविक‑समय निगरानी हो सके। उन्होंने सोमवार, 7 अक्टूबर को स्वयं प्रभावित क्षेत्रों की यात्रा करने का वादा किया, जिससे जनता को आश्वासन मिला।

प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार ने आपदा राहत के लिए तुरंत 150 करोड़ रुपये की आपातकालीन निधि उपलब्ध कराई। साथ ही, पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (PWD) ने इस बात की पुष्टि की कि पुल के हिस्से‑हिस्सा वाली संरचनात्मक जाँच दो दिन में पूरी होगी।

स्थानीय समुदायों पर प्रभाव और भविष्य की चुनौतियां

स्थानीय समुदायों पर प्रभाव और भविष्य की चुनौतियां

बिजली बंद, संचार नेटवर्क बिगड़ने और मुख्य सड़कों के फटे होने ने ग्रामीण जीवन को कठिन बना दिया। मीरिक के कई छोटे‑छोटे घरों की छतें भी बाढ़ में डूब गईं, जबकि किसानों की धान की प्यारी फसलें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। स्थानीय व्यापारी ने कहा, "हमारी इन्वेंट्री पूरी तरह खराब हो गई, और यात्रियों के बिना अब कोई राजस्व नहीं।"

भविष्य में और भी भारी बारिश की संभावना बनी हुई है, इसलिए विशेषज्ञों ने कहा कि सतह जल निकासी और पहाड़ी कटाव की रोकथाम के लिये दीर्घकालिक योजना बनानी आवश्यक है। कुछ पर्यावरण विज्ञानियों ने सुझाव दिया कि बाढ़‑प्रतिकारक बुनियादी ढाँचा जैसे कि उठाव वाले पुल और लैंडस्लाइड‑सेंसिंग सिस्टम स्थापित किया जाए।

जब तक पुल पुनः निर्मित नहीं हो जाता, शिलिगुड़ी‑दरजीली मार्ग के वैकल्पिक रास्ते बहुत कठिन और समय‑साध्य हैं। कई लोग अब टेम्पररी बोट सेवा की ओर मुड़ रहे हैं, पर यह समाधान केवल अस्थायी है।

Frequently Asked Questions

दुधिया इरन ब्रिज के ढहने से स्थानीय यात्रियों को क्या रोकना पड़ा?

बिजली के बिना शह‑12 पर सभी वाहनें रुक गईं, जिससे शिलिगुड़ी‑दरजीली के बीच के दैनिक यात्रियों, स्कूल बसों और आपातकालीन एम्बुलेंस की आवाज़ें कट गईं। अब स्थानीय लोग बोट या पर्वतीय पथों से गुजरने को मजबूर हैं, जिससे यात्रा समय दो‑तीन गुना बढ़ गया है।

सरकार ने इस आपदा में किन-किन राहत उपायों की घोषणा की?

केंद्रीय सरकार ने तत्काल वित्तीय सहायता के रूप में 150 करोड़ रुपये की आपात निधि अनुदानित की, जबकि राज्य सरकार ने 24×7 कंट्रोल रूम स्थापित की, NDRF को तीन विशेष टीमों भेजी और प्रभावित परिवारों को अस्थायी आश्रय, भोजन और चिकित्सा सुविधा प्रदान की।

मौसम विभाग ने आगे की बारिश के बारे में क्या चेतावनी जारी की?

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने 5 अक्टूबर के बाद भी "लाल चेतावनी" जारी रखी है, जिसमें अगले 48 घंटों में 150‑200 मिमी अतिरिक्त वर्षा की संभावना बताई गई है, जिससे अतिरिक्त लैंडस्लाइड और बाढ़ का जोखिम बना रहेगा।

पुल की मरम्मत कब तक संभव होगी?

PWD के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर ने कहा है कि जाँच के बाद दो‑तीन दिनों में मरम्मत के विस्तृत योजना तैयार होगी, और यदि मौसम सहयोग करे तो शुरुआती कार्य अगले हफ़्ते से शुरू हो सकते हैं। लेकिन पूर्ण रूप से फिर से खुलने में कम से कम चार‑पाँच हफ़्ते लग सकते हैं।

दुर्घटना के बाद पर्यावरणीय विशेषज्ञों की क्या राय है?

विज्ञान संस्थान के भू‑इंजीनियर ने कहा, "पहाड़ी कटाव को रोकने के लिये वनछाया पुनर्स्थापना, बाढ़‑नियंत्रक जलाशय और लैंडस्लाइड‑सेंसिंग उपकरण आवश्यक हैं। यह एक सिंगल पुल की समस्या नहीं, बल्कि व्यापक जलवायु‑परिवर्तन से जुड़ी चुनौती है।"

14 टिप्पणि

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    Poorna Subramanian

    अक्तूबर 6, 2025 AT 00:23

    दरजीली में बड़ी वैरिएबिलिटी देखी गई, बाढ़ से प्रभावित लाखों लोगों को तुरंत राहत दी जानी चाहिए. सरकार को जल निकासी प्रणाली को सुदृढ़ करना चाहिए. स्थानीय प्रशासन को प्रभावित क्षेत्रों में शारीरिक और मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान करनी चाहिए.

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    Soundarya Kumar

    अक्तूबर 6, 2025 AT 01:46

    भाई, इस बाढ़ ने तो सबको चौंका दिया, अभी लोग बोट से रास्ता बना रहे हैं, उम्मीद है कि जल्दी पुल फिर बन जाएगा.

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    Nathan Rodan

    अक्तूबर 6, 2025 AT 03:10

    दुधिया इरन ब्रिज का ढहना सिर्फ एक बुनियादी ढाँचा नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की रोज़मर्रा की ज़िन्दगी को प्रभावित करता है. पहाड़ी क्षेत्रों में भारी वर्षा का पैमाना बढ़ता जा रहा है, जिससे लैंडस्लाइड और बाढ़ का खतरा भी बढ़ता है. स्थानीय किसान अपनी फसल को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन जल स्तर की तीव्र वृद्धि ने कई खेतों को डुबो दिया. बचाव कार्यों में NDRF ने त्वरित प्रतिक्रिया दी, लेकिन ऐसी आपदाओं के लिए दीर्घकालिक योजना की आवश्यकता है. सरकार को तुरंत अस्थायी बुइंग पॉइंट्स स्थापित करने चाहिए, जिससे लोगों के पास सुरक्षित मार्ग हो. साथ ही, जल संचयन एवं जल निकासी प्रणाली को आधुनिक तकनीक के साथ अपडेट करना चाहिए. स्थानीय समुदायों को भागीदारी के अवसर देना चाहिए, ताकि वे स्वयं भी बचाव में मदद कर सकें. पर्यावरण विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि बाढ़‑नियंत्रक जलभरणी बनाना आवश्यक है. इसके अलावा, पहाड़ी कटाव को रोकने के लिये वृक्षारोपण का कार्यक्रम तेज़ी से चलना चाहिए. पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट को पुल के पुनर्निर्माण के लिए विशेषज्ञ इंजीनियरों की टीम को तेज़ी से कार्य करने देना चाहिए. वर्तमान में बोट सेवा अस्थायी है, लेकिन इसे निरंतर रखरखाव के साथ व्यवस्थित करना चाहिए. रोकथाम के उपायों में लैंडस्लाइड‑सेंसिंग सिस्टम को स्थापित करना भविष्य में बड़ी मदद करेगा. स्थानीय प्रशासन को तापमान, वर्षा, और जल स्तर की रीयल‑टाइम मॉनिटरिंग के लिये 24×7 नियंत्रण कक्ष बनाना चाहिए. अंत में, जनता को समय‑समय पर आपातकालीन योजना के बारे में शिक्षित करना आवश्यक है. इन सभी कदमों से ही हम भविष्य में ऐसी आपदाओं के प्रभाव को कम कर सकते हैं और जीवन रक्षा कर सकते हैं.

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    tanay bole

    अक्तूबर 6, 2025 AT 04:33

    पुल की मरम्मत में समय लगना स्वाभाविक है, लेकिन स्थानीय लोगों को वैकल्पिक मार्ग की तुरंत व्यवस्था करनी चाहिए.

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    Chinmay Bhoot

    अक्तूबर 6, 2025 AT 05:56

    सरकार की ये घोषणा सिर्फ दिखावा है, 150 करोड़ बेतुके खर्चों में से कोई भी आर्थिक मदद जमीन पर रहने वाले लोगों तक नहीं पहुँचती.

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    Raj Bajoria

    अक्तूबर 6, 2025 AT 07:20

    सभी को सुरक्षित रहने की जरूरत है.

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    KABIR SETHI

    अक्तूबर 6, 2025 AT 08:43

    आपकी तर्कसंगत विश्लेषण को सुनकर पता चलता है कि मौजूदा नीतियों में सवाल उठते हैं, लेकिन वास्तविक समाधान के बिना केवल आलोचना बेकार है.

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    santhosh san

    अक्तूबर 6, 2025 AT 10:06

    इस तरह की त्रासदी का सामना करने पर साहित्य में अक्सर दुख की गहराई को व्यक्त किया जाता है, पर वास्तविकता में लोगों की पीड़ा को शब्दों में बांधना कठिन है.

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    Sudaman TM

    अक्तूबर 6, 2025 AT 11:30

    भाई, आप तो बहुत हैफ़िज़ी हो गए 😂, असली समस्याओं पर ज्यादा बात नहीं करते, बस भावनाओं का नाटक कर रहे हैं.

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    Rohit Bafna

    अक्तूबर 6, 2025 AT 12:53

    वर्तमान जलवायु परिवर्तन की परिप्रेक्ष्य में राष्ट्रीय सुरक्षा की सीधा संबंध जलसंरक्षा से स्थापित होता है; अतः रणनीतिक बुनियादी ढाँचा पुनः मूल्यांकन अनिवार्य है।

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    Minal Chavan

    अक्तूबर 6, 2025 AT 14:16

    रिपोर्ट में उल्लेखित उपायों का शीघ्र कार्यान्वयन प्रदेश की पुनर्स्थापना में सहायक होगा।

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    Nanda Dyah

    अक्तूबर 6, 2025 AT 15:40

    उल्लिखित प्रस्तावों में अभियांत्रिकी दृष्टिकोण के अतिरिक्त सामाजिक पुनर्वास के प्रावधानों का समावेश आवश्यक है, अन्यथा पुनरावृत्ति जोखिम अपर्याप्त रहेगा।

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    vikas duhun

    अक्तूबर 6, 2025 AT 17:03

    ये बाढ़ हमें चेतावनी देती है कि हमारे देश की सीमाओं की रक्षा केवल सेना से नहीं, बल्कि जल प्रबंधन से भी होनी चाहिए! हर एक गांव को अब राष्ट्रीय स्तर की सुरक्षा का हक है, और हमें इसे तुरंत सुनिश्चित करना चाहिए! सरकार की लापरवाही पर हमें गुस्सा नहीं, बल्कि कार्रवाई चाहिए! इस त्रासदी को भूलना नहीं, बल्कि सीख लेकर भविष्य की योजना बनानी चाहिए!

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    Simardeep Singh

    अक्तूबर 6, 2025 AT 18:26

    सच में, जब प्रकृति हमें ऐसा सिखाती है, तो हमें अपने विचारों को आध्यात्मिकता से नहीं, बल्कि ठोस कार्य से पूरित करना चाहिए, नहीं तो सिर्फ शब्द हवा में खो जाएंगे.

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