एलपीजी संकट: कांग्रेस ने किया विरोध, बिहार सरकार बोली नहीं होगी कमी

एलपीजी संकट: कांग्रेस ने किया विरोध, बिहार सरकार बोली नहीं होगी कमी

एलपीजी सिलेंडर की कमी को लेकर राजनीतिक गुस्सा चरम पर है। एक तरफ विपक्ष दलों ने संसद और शहरों में प्रदर्शन किए, दूसरी ओर सरकार दावे कर रही है कि भंडार में कोई भारी कमी नहीं है। जनवरी 31 को संसद में राहुल गांधी की अगुवाई में विरोध देखा गया, जबकि मार्च में पटना में भाजपा के साथ ही विपक्ष ने भी अपने पक्ष की मजबूती जताई। स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि रेस्तरां मालिकों को लकड़ी से खाना पकाना पड़ा।

राजनीति और वास्तविकता का टकराव

खबर तो बसी कि देश भर में गैस सिलेंडर नहीं मिल रहे, लेकिन हकीकत थोड़ी अलग लग रही थी। कांग्रेस और इंडिया गठबंधन ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने ऊर्जा संकट का सामना करने में विफलता दिखाई है। संसद में विरोध प्रदर्शन नई दिल्ली , यहां राहुल गांधी, लोकसभा विपक्ष नेता ने मुख्य रूप से मांग उठाई थी। उनका कहना था कि आम जनता रोजमर्रा की जरूरतों से वंचित हो रही है। वहीं, 19 मार्च को पटना में बिहार के कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री के पुतले जलाकर अपनी आक्रोश व्यक्त किया।

रेस्तरां मालिकों की मुसीबतें

जब राजनेता बोलते हैं, तो नीचे जमीन पर असर दिखता है। भोपाल में सगर गेयर फास्ट फूड के मालिक डोल्जिर गेयर ने बताया कि वे अब इंडक्शन चूल्हों का सहारा ले रहे हैं। "हमने अपने 60% काम इंडक्शन कर लिया है," उन्होंने कहा। यह बदलाव आसान नहीं था। हिंदुस्तान के तेलंगाना राज्य में तो हालात और खराब थे। हैदराबाद के एमएस मांडी मालिक नादीम कुड़्री ने बताया कि उन्हें लकड़ी पर खाना बनाना पड़ रहा है। नादीम कुड़्री का कहना था कि इससे दूषित धुएं ने रेस्तरां की सफाई पर असर डाला है। "रमजान के दौरान भी हम लोगों को खाना पहुंचा रहे हैं, लेकिन लागत बढ़ गई है।"

सरकार का प्रत्युत्तर और आंकड़े

विरोधों के बीच सरकार शांत रही और आंकड़ों से बातचीत शुरू की। केंद्र सरकार का कहना है कि घरेलू एलपीजी उत्पादन में 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। प्राथमिकता दी जा रही है कि अस्पताल और स्कूल को सप्लाई निरंतर रहे। भारतीय तेल निगम लिमिटेड, केंद्र सरकार के महाप्रबंधक अनुप कुमार समंताय ने साफ किया कि स्टॉक पर्याप्त है। हालांकि, व्यावसायिक उपयोग पर रोक लगाने का फैसला लिया गया है ताकि आम घरों तक पेट्रोलियम पहुँचा सकें।

बिहार सरकार की जांच और कंट्रोल रूम

बिहार में स्थिति को लेकर विवाद जारी रहा। प्रत्याय अमृत, मुख्य सचिव ने उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। इसमें कंपनी प्रतिनिधि मौजूद थे। अमृत ने जिला मजिस्ट्रेटों को निर्देश दिए कि ब्लैक मार्केटिंग पर तुरंत कार्रवाई हो। उन्होंने कहा कि झूठी खबरों पर भरोदा नहीं करना चाहिए। पटना समेत सभी जिलों में विशेष कंट्रोल रूम खोले गए हैं। डीओपी और एडीएम को दैनिक प्रेस ब्रीफिंग के जरिए जानकारी देने को कहा गया है ताकि लोग सही तथ्यों से जुड़े रहें।

अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का असर

क्या यहाँ की समस्या पूरी तरह स्थानीय है? नहीं। वैश्विक तनाव का असर महसूस हो रहा है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और होर्मूज़ जलडमरु में ईरानी व्यवधान ने आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है। यही कारण है कि भारतीय बाजारों में मूल्य में उतार-चढ़ाव आ रहे हैं। सरकार का मानना है कि इन वैश्विक चुनौतियों के बावजूद आयात और स्थानीय उत्पादन से संतुलन बना हुआ है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एलपीजी संकट की असली वजह क्या है?

वैश्विक तनाव और मध्य पूर्व के संघर्ष के कारण आयात में बाधाएं आई हैं। इसके साथ ही, व्यावसायिक उपयोग पर नियंत्रण लगाने की आवश्यकता है ताकि घरेलू जरूरतें पूरी हो सकें। सरकार ने कहा है कि ब्लैक मार्केटिंग भी इसकी एक वजह है।

बिहार में गैस कमी है या नहीं?

बिहार सरकार के अनुसार, राज्य में घरेलू सिलेंडर की कोई कमी नहीं है। हालांकि, व्यावसायिक सप्लाई को सीमित कर दिया गया है ताकि जनहित संरक्षित रहे। अस्पतालों और स्कूलों को हर समय पहले प्राथमिकता दी जा रही है।

विपक्ष ने क्यों प्रदर्शन किया?

कांग्रेस और इंडिया गठबंधन ने आरोप लगाया कि सरकार ने जनता की समस्या सुनने में विफल रही है। उन्होंने संसद और राज्यों में सड़कों पर धरने दिए ताकि उनकी मांगों पर ध्यान दिया जाए। यह प्रदर्शनी जनवरी से मार्च तक चली थी।

लोगों के लिए कोई राहत योजना है?

सरकार ने कंट्रोल रूम लगाए हैं और ब्लैक मार्केटर्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की धमकी दी है। आम नागरिकों को सुविधाजनक दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है। सोशल मीडिया पर झूठी खबरों से बचने का आग्रह किया गया है।